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कलम रोपण पद्धति- बिना बीज उगाए टमाटर

कलम रोपण पद्धति- बिना बीज उगाए टमाटर
Written by Vijay Dhangar

‘बिना बीज फल कैसे’ तकनीक के युग में यह कहावत बेमानी हो रही है। अब हाइब्रिड किस्म के टमाटर का उत्पादन भी बिना बीज यानि कलम रोपण पद्धति से किया जा रहा है। बारां जिले के अन्ता कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इस प्रयास में सफल रहे हैं और इस तकनीक को किसानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।

अन्ता कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का प्रयास

कलम रोपण पद्धति- बिना बीज उगाए टमाटर

कलम रोपण पद्धति से उत्पाद, 30 दिन का समय बचाएं

टमाटर की हाइब्रिड किस्मों के बीज बाजार में महंगे आते हैं। 10 ग्राम बीज की कीमत 700 से 800 आती है। कलम तकनीक को अपनाने से किसानों को बार-बार बीज खरीदने की जरूरत नहीं होती। सिर्फ एक बार बीज या पौध की जरूरत होती है, जिसे तैयार पौध को मदर प्लांट कहा जाता है। इस में पैदा हुए टमाटर के पौधों के काटकर दूसरी जगह कलम रोपण पद्धति द्वारा लगा दी जाती है। इस कलम की लंबाई 5 इंच होती है और रोपण के बाद सिंचाई की जाती है।

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40- 42 दिन में फलाव

इस पद्धति में 30 दिन का नर्सरी व फलाव का समय बचाया जाता है। कलम से पौध तैयार करने में 40 से 42 दिन में फलाव आ जाता है। जिससे 30 से 35 दिन का सिंचाई व खाद का खर्च भी बचाया जा सकता है। इस तरीके से वर्ष में तीन बार टमाटर की खेती करने के साथ कुछ पौधों को मदर प्लांट के रूप में बचाकर अगले साल रोपण के लिए भी सुरक्षित रखा जा सकता है। इस तकनीक में गुणवत्ता और फलाव में फर्क नहीं आता। वही पौधे के रोगग्रस्त होने पर उसके स्थान पर दूसरे का लगा दी जाती है।

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पिछले साल हुआ पुरस्कृत

केवीके की ओर से वर्ष 1998 में इस तकनीक का अनुसंधान शुरू हुआ। पिछले साल दिसंबर में कानपुर में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में नवाचार को पुरस्कृत किया जा चुका है। नागदा की झोपड़ियां गांव में इसका लाभ उठा रहे हैं।

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इनका कहना

केवीके के द्वारा वर्ष 1998 से बिना बीज के टमाटर उगाने का अनुसंधान कर रहे हैं। इसमें टमाटर की पौध की तरह ही कलम किया जाता है। कई किसान इसका लाभ उठा रहें हैं। व्यापक स्तर पर प्रसार के प्रयास है।

डी के सिंह, कृषि विज्ञानिक केवीके अन्ता (बारां)

स्त्रोत

राजस्थान पत्रिका

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