खेती-बाड़ी

कृषि बाजार से जुड़ी मुख्य समस्याएं एवं सुझाव

कृषि बाजार
Written by Bheru Lal Gaderi

आज के वर्तमान परिपेक्ष में कृषि उत्पादों के विपणन का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है, आज किसानों को कृषि व्यवसाय स जुड़े रहने के लिए प्रत्येक व्यवसायिक गतिविधियों से गहरी तौर पर जुड़ा होना अत्यन्त ही आवश्यक है। आज के समय में कृषि बाजार (Agricultural market) के अनुरूप हो गयी है जिसमे किसानों द्वारा उत्पादित कृषि उत्पाद उपभोक्ताओं (ग्राहक) के पास किस माध्यम से पहुँचता है इसकी जानकारी होना बहुत जरुरी है।

कृषि बाजार

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बाजार में कृषि उपज का भाव मुख्य रूप से मांग तथा उसकी पूर्ति के ऊपर ही निर्भर करता है इसी के साथ कृषि बाजार के मध्यस्थों तथा अन्य संस्थाओं की उपस्थिति का भी कृषि उपज के भाव निर्धारण में बहुत ही महत्व की भूमिका होती है।

भारत सरकार द्वारा अपनाये गए आर्थिक सुधारों तथा विश्व व्यापार संघठन द्वारा तैयार किये गए करार पर सहमति व्यक्त करने से वैश्विक स्तर पर कृषि उत्पादों की निकासी का रास्ता साफ हो गया है।

अतः आज के संदर्भ में किसानों को अपने कृषि उत्पादन को बेचने के विषय में चिंतित होना अत्यंत ही आवश्यक हो गया है।

कृषि बाजार से जुड़ी मुख्य समस्याएं:-

बाजार मध्यस्थ:-

कृषि बाजार व्यवस्था में किसान तथा उपभोक्ताओं के बिच मध्यस्थ जरुरी तो होते है परन्तु अभी हाल में जो बाजार व्यवस्था है इसमें मध्यस्थों की संख्या जरुरत से बहुत अधिक है, जिसके कारण किसानों से उपभोक्ताओं तक कृषि उत्पादों के पहुंचने तक उनकी कीमत में कई गुना वृद्धि हो जाती है, उपभोक्ता बाजार में जो भाव चुकाते है उसकी तुलना में किसानों को बहुत कम दाम मिलता है।

कम लाभ:-

किसी भी बाजार व्यवस्था में मध्यस्थों की सेवा लेना बहुत ही जरुरी होती है, परन्तु आज की परिस्थिति में तो ऐसा प्रतीत होता है की वो अपनी सेवाओं की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त कर रहे है, जो की बहुत ही गलत है।

इस विषय में किये गए अनुसन्धान से ये जानकारी सामने आयी है की ग्राहक द्वारा खर्च किये गए धन का मात्र 40-50% हिस्सा ही किसान को प्राप्त होता है बाकि के 50-60% बाजार खर्च तथा मध्यस्थों के लाभ में चले जाते है इसे कम करने की बहुत ही आवश्यकता है।

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मुलभुत सुविधाओं का आभाव:-

कई गांवों में आज भी मुलभुत सुविधाओं जैसे – परिवहन, वेयर हॉउस आदि सेवाओं का सर्वथा आभाव है अथवा उनमे कई प्रकार की कमियां है।

कृषि बाजार भाव निर्धारण नीति में खामी:-

आज कृषि बाजार में जो उपज की भाव निर्धारित करने की जो व्यवस्था है वो खामियों वाली है आज भी नियंत्रित बाजारों में कृषि जिसों की सही प्रकार से नीलामी नहीं होती है।

कई बाजारों में तो व्यापारी आपस में मिलकर कृषि उत्पादों का भाव निर्धारित कर के किसानों को उचित भाव को नहीं मिलने देते है। कई बाजारों में तो खुली नीलामी भी नहीं होती है।

कृषि उत्पादों की ग्रेडिंग:-

किसानों में अपने कृषि उत्पादों को सही प्रकार से ग्रेडिंग करने की प्रवृति नहीं है इससे भी उनकों बहुत नुकसान उठाना पड़ता है और बजार में उचित कीमत नहीं मिल पाती है।

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विपणन:-

अभी हाल ही में कई ऐसी कृषि फसलें किसानों द्वारा पसंद की जाने लगी है जैसे – बेबी कॉर्न, स्वीट कॉर्न। किसान इस प्रकार की फसलों को तैयार तो कर लेते है मगर विपणन की विधि उसे नहीं आती है।

कीमत चुकाने में खामियां:-

बाजार में भी किसान को उसके उत्पादों की कीमत चुकाने में कई खामिया देखने को मिलती है व्यापारी किसानों को उनकी उपज का दाम तुरंत नहीं देते है अथवा बहुत बाद में देते है तथा उसका ब्याज भी नहीं चुकता है। जिससे अन्ततः किसान को ही नुकसान उठाना पड़ता है।

ऋण व्यवस्था:-

किसानों के लिए ऋण की सरल व्यवस्था होनी बहुत ही जरुरी है। प्रायः देखा गया है की ग्रामीण क्षेत्रों के किसान तुरंत ऋण लेने के लिए व्यापारी के पास ही जाते है जिससे इन किसानों को अपने कृषि उपज को उसी व्यापारी के पास ही बेचने की मजबूरी बन जाती है जिससे किसान की विक्रय शक्ति में कमी आती है।

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सहकारी बाजारों का विकास:-

कृषि-उत्पादन को देखते हुए आज भी हमारे यहाँ पर पूरी संख्यां में सहकारी बाजारों का विकास नहीं हुआ है। कई स्थानों पर इस प्रकार के सहकारी बाजारों का प्रयास निष्फल हुआ है अतः इन समस्याओं को हमारी व्यवस्था से दूर करने की बहुत अधिक जरूरत है।

  1. कृषि उत्पादों से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसान क्या करें
  2. कृषि उत्पादों को उनके प्रकार के अनुसार अलग-अलग समूहों में रखकर साफ करके कृषि बाजार में ले जाना चाहिए।
  3. सदैव फसल की अलग-अलग किस्मों को अलग-अलग समूह बना करके बेचने के लिए ले जाना चाहिए।
  4. उत्पाद को उनकी गुणवत्ता के अनुसार ग्रेडिंग करके रखना व बेचने के लिए ले जाना चाहिए।
  5. किसान को अपने उत्पादों को बाजार में बेचने के लिए ले जाने से पूर्व क्षेत्र के अलग-अलग बाजारों में चलने वाले भावों की सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।

कृषि उत्पादों की आकर्षक पैकिंग:-

कृषि उत्पादों को कृषि बाजार में ले जाने से पूर्व उनका सही प्रकर से वजन करना चाहिए तथा उनको अच्छे ठेलों/डिब्बों में पैक करके आकर्षक बनाकर ले जाने से उपभोक्ताओं की नजर में वो उत्पाद अधिक आता है तथा उनके अच्छे दाम मिलते है। अच्छे दाम प्राप्त करने में अच्छी पैकिंग का बूत महत्व है।

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ऑफ सीजन में कृषि उत्पादों का विक्रय:-

फसल तैयार होने के तुरंत बाद अपने उत्पादों को नहीं बेचना चाहिए बल्कि बाजार पर नजर रख कर अपने कृषि उत्पादों को बेचने के लिए ले जाना चाहिए। किसानो के पास यदि संग्रह करने की अनुकूलता हो तो उसे अपने कृषि उत्पादों को कुछ समय  तक संग्रहित करके ऑफ सीजन में अच्छे दाम प्राप्त हो सकते है।

सामूहिक तौर पर कृषि उत्पादों का विक्रय:-

किसान कई बार व्यक्तिगत रूप में कृषि उत्पादों का विक्रय करके अधिक लाभ नहीं ले सकते है ऐसी दशा में उनको सामूहिक तौर पर अपने उत्पादों को बेचने का प्रयास करना चाहिए। उनकों सहकारी मंडल का निर्माण करना व उनके मार्फत कृषि उत्पादों का विक्रय करना चाहिए।

जब नियन्त्रिक कृषि बाजारों में कृषि उत्पादों की बिक्री करें तो हमेश बिक्री की रसीद लेनी चाहिए। साथ ही साथ ध्यान रखना चाहिए की बाजार में सही प्रकर से कृषि उत्पादों की नीलामी हो रही है या नहीं। यदि नियम के अनुसार काम नहीं हो रहा है तो उचित स्थान पर शिकायत करनी चाहिए।

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उन्नत किस्मों की बुवाई:-

हमेशा अच्छे दाम प्राप्त करने के लिए उन्नत किस्मों के बीज की बुवाई करनी चाहिए।

जैविक खेती:-

उपभोक्ताओं की नई पसंद के अनुसार जैविक खेती (ऑर्गेनिक) को अपनाना संभव हो तो उसे अपनाना चाहिए।  इस हेतु किसानो को अलग-अलग प्रकार के प्रशिक्षण भी लेकर अपनी क्षमता को बढ़ाना चाहिए।

अभी हल के समय में बड़े-बड़े माल, बाजारों में ऑर्गेनिक उत्पादों का अधिक मात्रा में क्रय-विक्रय होता है। आज के समय में माध्यम और उच्च वर्ग के लोग इस प्रकार के कृषि उत्पादों को खरीदना पसंद करते है। बड़े किसान ऑर्गेनिक उत्पादों में अपनी स्वयं की “ब्रांड इमेज” बना सकते है।

कृषि प्रसंस्करण:-

किसानो को कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण करके मूल्य वृद्धि का लाभ उठाना चाहिए। उदाहरण के लिए छोटी तेल मिल अथवा दाल मिल स्थापित करके अपने अपने गांव में अधिक से अधिक आवक के लिए प्रयास करने चाहिए।

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किसान समूहों का निर्माण:-

किसानों को यह पता चले कि दूर शहर में उसके उत्पाद बेचने से अच्छे दाम मिलेंगे मगर वहां तक अपने माल को पहुँचाना उसे आर्थिक रूप से सही नहीं लगता है तो ऐसी स्थिति में किसान समूहों का निर्माण करके अपने उत्पादों को एक साथ बेच कर अधिक मुनाफा कमा सकते है।

आज के वैश्वीकरण के युग में जब सरे विश्व के कृषि बाजार खुले है ऐसी स्थिति में किसान भी अपने कृषि उत्पादों को दुनियां के इन कृषि बाजारों में बेचने के बारे में सोच सकता है मगर इस हेतु उसे अपने उत्पादों की गुणवत्ता के बारे में बहुत ही सजग रहना होगा तथा इस प्रक्रियां में दक्षता प्राप्त करनी होगी।

किसानों को जंहा तक संभव हो वाहन तक ‘डाइरेक्ट मार्केटिंग” (सीधे विपणन) द्वारा अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।

सारांश :-

अतः किसान भाई इस विषय में जागृत होकर विपणन की सही प्रक्रियाएं अपनाकर अपने उत्पादों को सही तरीके से बेच कर अधिक से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते है।

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Author :-

डॉ रुचिरा शुक्ल

अस्पी एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट,

नवसारी कृषि विश्वविद्यालय नवसारी -396450

गुजरात

About the author

Bheru Lal Gaderi

नमस्ते किसान भाइयों मेरा नाम भेरू लाल गाडरी है। इस वेबसाईट को बनाने का हमारा मुख्य उद्देश्य किसान भाइयों को खेती-किसानी, पशुपालन, विभिन्न कृषि योजनाओं आदि के बारे में जानकारी प्रदान करना है।