कृषि यंत्र

कृषि यंत्रों में नए अनुसंधान एवं नवाचार

कृषि यंत्रों
Written by Bheru Lal Gaderi

नमस्ते किसान भाइयों वर्तमान समय में खेती किसानी कार्यों को करने में किसानों को आने वाली परेशानियों को देखते हुए देश के कृषि संस्थानों ने कई प्रकार के नए कृषि यंत्रों (Agricultural equipments) का आविष्कार किया है तो आइए जानते हैं कि इन कृषि यंत्रों के बारे मे की किस प्रकार से ये हमरे कार्य को आसान बना सकते है।

कृषि यंत्रों में किये गए नए अनुसंधान एवं नवाचार निम्नलिखित है:-

साइकिल की उर्जा से चालित पोर्टेबल सिंचाई पंप:-

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी को देखते हुए साइकिल की ऊर्जा से चलने वाला पोर्टेबल सिंचाई पंप विकसित किया गया है। यह सीमांत , छोटे किसानों के लिए काफी उपयोगी है। इससे पानी निकास की दर औसतन 27 से 40 लीटर प्रति मिनट है।

पानी की निकासी इसे दी गई ऊर्जा पर निर्भर करती हैं, जो इसके पैडल मारने यानी साइकिल को चलाने पर पैदा होती हैं। जितनी तेजी से पैदल मारे जाएंगे उतना ही पानी आएगा। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है और जहां अब तक सिंचाई संभव नहीं हो पाती थी वहां भी यह सिंचाई कर सकता है।

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समशीतोष्ण क्षेत्र के लिए उन्नत बायोगैस प्लांट:-

समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए फ्लोटिंग ड्रम टाइप का बायोगैस प्लांट विकसित किया गया है। इसकी अवरोधन अवधि 40 दिन की है। इसमें ताजा गोबर और पानी के जरिए गैस बनाई जाती हैं।

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प्लांट की क्षमता की 70-प्रतिशत गैस बनती है। इसमें उचित तापमान बनाए रखने के लिए पॉलीहाउस जैसा जैसा ढांचा बनाया गया हैं। इसमें जून से अगस्त तक बायोगैस का सामान्य उत्पादन होता है। मार्च से मई ओर सितंबर से नवंबर के दौरान इंसुलेशन के जरिए बायो गैस उत्पादन किया जा सकता है।

दिसम्बर से फरवरी के दौरान सर्दी होती हैं। इसलिए गर्म पानी डालकर बायोगैस उत्पादित की जा सकती हैं। इस तरह इस प्लांट से सालभर बायोगैस प्राप्त की जा सकती हैं।

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पैर से चलने वाला मक्का शैलर:-

मक्का छीलने का परंपरागत तरीका बहुत श्रमसाध्य और समय लेने वाला काम है। इसे देखते हुए कम लागत और अधिक दक्षता वाला मक्का शैलर बनाया गया है।

मक्का शैलर

इसका औसत आउटपुट 24. 27 किलो प्रति घंटा है और 57. 32 प्रतिशत इस की दक्षता है।

इसमें 16 से 18% नमी होने पर 5.15% तक ही खराब आया है। इसमें शेलिंग की लागत  62 रूपये प्रति क्विंटल है और मशीन की कीमत सिर्फ 3000 रूपये हैं।

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अखरोट का छिलका उतारने की मशीन:-

अखरोट को हाथ से छीलना बहुत मुश्किल होता है। भारत में अभी यह काम हाथ से ही किया जाता है।

हाथ से अखरोट छीलने का काम 25 से 30 किलोग्राम प्रति घंटा की दर से हो पाता है।  इस काम के लिए कुछ विदेश मशीनें आई हैं, लेकिन वह काफी महंगी है और औद्योगिक उत्पादन के लिए हैं।

अखरोट छिलने की मशीन

इसे देखते हुए एक मोटर से चलने वाली मशीन बनाई गई हैं, जो को अखरोट को कतरती हुई चलती है। इसकी गति बढ़ाने पर उत्पादन तो ज्यादा मिलता है लेकिन नुकसान भी ज्यादा होता है।

फिर भी यदि इसे 350 आरपीएम पर चलाए जाए और अखरोट को कटाई के बाद ज्यादा लंबे समय तक नहीं रखा गया हो, पूरी तरह से सुख गया हो तो 350 किलो प्रति घंटा के हिसाब से उत्पादन मिल जाता है। 7% खराब होता है।

इसकी लागत 30 से 50 पैसे प्रति किलो आती हैं। मशीन की कीमत 27500 रूपये हैं।

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खूबानी हार्वेस्टिंग नेट:-

मैकेनिकल शेकर या वाइब्रेटर वाली फ्रूट हार्वेस्टिंग नेट फल उत्पादकों के लिए बहुत उपयोगी है। परंपरागत तरीके से जहां 15 से 17 किलोग्राम प्रति घंटे के हिसाब से कटाई होती हैं।

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वहीं इसके जरिए 300 से 350 किलोग्राम प्रति घंटा के हिसाब से कटाई हो सकती हैं। इसके जरिए प्राप्त किए गए फलों की कीमत भी 20 से 30% अधिक मिलती हैं। इसके अलावा फलों की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।

कटाई की लागत सिर्फ 1.0 से 1.40 रुपये प्रति किलो आती हैं और इसकी कीमत 7000 रुपये हैं।

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प्रस्तुति:-

डॉ. रोहिताश्व कुमार,

एसोसिएट प्रोफेसर

एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग

एसकेयूएएसटी

जम्मू कश्मीर

साभार:- शरद कृषि

 

About the author

Bheru Lal Gaderi

नमस्ते किसान भाइयों मेरा नाम भेरू लाल गाडरी है। इस वेबसाईट को बनाने का हमारा मुख्य उद्देश्य किसान भाइयों को खेती-किसानी, पशुपालन, विभिन्न कृषि योजनाओं आदि के बारे में जानकारी प्रदान करना है।