कृषि योजनाएं

राजस्थान में प्रमुख सरकारी कृषि योजनाएं एवं अनुदान

कृषि योजनाएं
Written by Bheru Lal Gaderi

कृषकों को देय सुविधाएं – कृषि

राजस्थान सरकार द्वारा कृषि की उन्नत तकनीक अपनाने व उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि कर आमदनी बढ़ाने के लिए विभिन्न कृषि योजनाएं (Agricultural schemes)संचालित की जा रही है।

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जिनके तहत देय सुविधाओं का विवरण निम्न प्रकार से है :-

जल प्रबंधन (व्यक्तिगत लाभार्थी कृषक योजना)

डिग्गी निर्माण:-

कृषक द्वारा न्यूनतम चार लाख लीटर एवं इससे अधिक क्षमता की पक्की डिग्गी निर्माण करने पर लागत की 50% राशि (रु. 350 प्रति घन मीटर भराव क्षमता की दर से ) तथा प्लास्टिक लाइनिंग (कच्ची) डिग्गी पर लागत की 50% (राशि रु. 100 प्रति घन मीटर भराव क्षमता की दर से) अथवा अधिकतम रु.लाख जो भी कम हो, अनुदान देय है।

कृषि योजनाएं

फार्म पौण्ड निर्माण (PMKSY):-

न्यूनतम 600 घन मीटर क्षमता की खेत तलाई निर्माण पर इकाई लागत का 50% अथवा अधिकतम राशि रु. 52,500 कच्चे फार्म पॉण्ड पर तथा राशि रु. 75000 प्लास्टिक लाइनिंग के साथ (300 माइक्रोन, बी.आई.एस. मापदण्ड) जो भी कम हो अनुदान देय है।

पाइपलाइन (RKVY/NMOOP/NFSM):-

लागत का 50% या अधिकतम राशि रु. 50 प्रति मीटर एच.डी.पी.ई. पाइप या राशि रु. 35 प्रति मीटर पीवीसी पाइप या राशि रु. 20 प्रति एच.डी.पी.ई. लेमिनेटेड ले-प्लैट ट्यूब पाइप या अधिकतम राशि रु. 15000 अनुपातिक रूप से, जो भी कम हो, अनुदान देय है।

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प्रशिक्षण/प्रोत्साहन

प्रशिक्षण:-

कृषकों को तकनीकी जानकारी से रूबरू करवाने के लिए अन्तर्राज्य (राज्य के बाहर) व राज्य के अंदर पुरुष/महिला कृषक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। भ्रमण 5-7 दिवसीय होता है, जिसमे 40-50 कृषक भाग लेते है।

कृषि शिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन:-

कृषि (Agricultural) विषय लेकर 10+2 (सीनियर सेकेण्डरी) कृषि, स्नातक एवं स्नातकोत्तर कृषि तथा पीएचडी कृषि में अध्ययन करने वाली छात्राओं को क्रमश: राशि रु. 5000, 12000, तथा 15000 रूपये प्रति छात्रा प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि राज्य योजना अंतर्गत दिये जाने का प्रावधान है।

वृक्ष जनित तिलहन(TBOs) का रोपण (राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन):-

वृक्ष जनित तिलहन(TBOs) के पौधरोपण हेतु नीम पर प्रति हेक्टेयर रु. 17000, जोजोबा पर रु. 35000, जेट्रोफा पर रु. 41000 एवं जैतून पर रु. 48000 प्रति हेक्टेयर का अनुदान देय है। इस प्लांटेशन के संरक्षण हेतु नीम, करंज एवं महुआ के लिए दूसरे वर्ष 2000 तथा जोजोबा, जैतून एवं जेट्रोफा के लिए रु. 3200 प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष अनुदान देय है। फसलों के अंतरशस्य के लिए रु. 1000 प्रति हेक्टेयर अनुदान देय है।

गुण नियंत्रण:-

राज्य में स्थित बीज एवं उर्वरक प्रेक्षण प्रयोगशालाओं में कृषकों के द्वारा भेजे गए बीज व् उर्वरक नमूनों की गुणवत्ता की जाँच नई शुल्क की जाती है।

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प्रधानमंत्री फसल बिमा:-

किसानों को अचानक आये जोखिम या ख़राब मौसम से फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए खरीफ 2016 से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की मुख्य विशेषताएं निम्न है :-

  1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ मौसम में 2% व रबी मौसम में 1.5% तथा वाणिज्यिक व उद्यानिक फसलों हेतु 5% कृषक प्रीमियम राशि राखी गई है।
  2. फसल बीमा योजना ऋणी कृषकों के लिए अनिवार्य तथा गैर ऋणी कृषकों के लिए स्वेच्छिक है।
  3. गैर ऋणी कृषक इ-मित्र के माध्यम से अधिसूचित फसलों का बीमा करवा सकते है।
  4. बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बुवाई नहीं कर पता है तो यह जोखिम में शामिल है, उसे दवा राशि मिल सकेगी।
  5. ओलावृष्टि, जल भराव, भू-स्लखन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को स्थानीय आपदा माना गया है, निर्धारित कमिटी द्वारा सर्वे कर दवा राशि प्रदान की जायेगी।
  6. फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल खेत में है, और इस दौरान कोई आपदा जैसे चक्रवात, एवं बेमौसम वर्षा से नुकसान होता है तो किसानों को दावा राशि मिल सकेगी।
  7. फसल कटाई प्रयोंगों के आधार पर प्राप्त औसत उपज, गारण्टी उपज से काम रहने पर बिमा क्लेम देय है।

जिप्सम वितरण कार्यक्रम क्षारीय भूमि सुधार (राष्ट्रिय कृषि विकास योजना / नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर):-

योजना के तहत जिप्सम का उपयोग मृदा सुधारक के रूप में मिट्टी की जाँच रिपोर्ट में जिप्सम की आवश्यक मात्रा (जी.आर.वेल्यू.) के अनुसार अधिकतम 5 मेट्रिक टन प्रति हेक्टयर प्रति कृषक अधिकतम 2 हेक्टेयर तक अनुदान देय है।

पोषक तत्व (NMOOP/NFSM):-

फसलों को सूक्ष्म पोषक तत्व तथा कैल्शियम व सल्फर की पूर्ति हेतु करषकों को 250 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम 2 हेक्टेयर हेतु जिप्सम अनुदान  पर उपलब्ध करवाई जाती है।

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सॉयल हेल्थ कार्ड योजना:-

कृषकों को नियमित अन्तराल पर उनके खेत की मिट्ठी के उर्वरा स्तर की जानकारी देने तथा फसलों में मृदा जांच की सिफारिश अनुसार उनके संतुलित खाद एवं उर्वरक प्रबंधन को बढ़वा देने के उद्येश्य से सॉयल हेल्थ कार्ड योजना प्रारम्भ की गई है।

कार्ड में दी सिफारिश के अनुसार उर्वरक प्रयोग से प्रति इकाई लगत में कमी, उत्पादन में वृद्धि एवं मिट्ठी की उर्वरता शक्ति बरकरार रखते हुए इसकी उपजाऊ क्षमता में बढ़ोत्तरी होती है।

सिंचित क्षेत्रों में 2.5 हेक्टेयर तथा असिंचित क्षेत्र से एक सयुंक्त प्रतिनिधि नमूना।

एकत्रित नमूनों में मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच।

नमूनों की जाँच:-

विभागीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला एवं पीपीपी मोड पर संचालित मृदा मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के माध्यम से कराई जा रही है।

सॉयल हेल्थ कार्ड:-

ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से कम्प्यूटराइज्ड सॉयल हेल्थ कार्ड किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

योजना के अतिरिक्त यदि कृषक मृदा नमूनों के मुख्य पोषक तत्व एवं पानी जांच तथा क्षारीय भूमि हेतु जिप्सम की आवश्यकता की जांच कराना चाहता है तो वह 5 रूपये जमा करवा कर जांच करवा सकता है।

परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY):-

परम्परागत कृषि विकास योजना(PKVY) के अन्तर्गत पर्यावरण व उपभोक्ता के स्वास्थ्य की रक्षा को के लिए कृषि में रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग को कम करने हेतु जैविक खेती गतिविधियों के लिए सहायता दी जा रही है। योजना क्लस्टर (५० एकड़ क्षेत्र) आधारित है। योजनादा अन्तर्गत जैविक बीज, वर्मी कम्पोस्ट इकाई, रिकार्ड संधारण, मृदा नमूना, संग्रहण एवं जाँच भूमि का जैविक परिवर्तन, तरल जीव उर्वरक, जीव कीटनाशी, नीम खली, कृषक प्रशिक्षण, ढेंचा/सनई प्रयोग, वानस्पतिक काढ़ा इकाई एवं परिवहन सुविधा आदि गतिविधियों हेतु कृषकों को तीन वर्ष की अवधि तक अनुदान सहायता देय है।

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राष्ट्रिय टिकाऊ खेती मिशन (एन.एम.एस.ए.):-

यह योजना वर्षा आधारित क्षेत्रों में क्रियान्वित की जा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कृषि से अधिक उत्पादन प्राप्त करना तथा टिकाऊ खेती पर जोर देना हैं। यह मिशन प्राकृतिक जल स्त्रोतों, मृदा संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं कृषक की क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं।

मिशन अंतर्गत देय सुविधाए:-

उद्द्यानकी आधारित कृषि पद्धति-

आदान की लागत का 50% अथवा अधिकतम रु. 25,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान देय हैं।

पेड़ आधारित कृषि पद्धति-

इस हेतु आदान की लागत का 50% अथवा अधिकतम रु. 15,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान देय हैं।

पशुपालन आधारित कृषि पद्धति-

गाय/भैस/डेयरी हेतु कीमत का  50% अथवा अधिकतम रु. 40,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान देय हैं।

बकरी/भेड़/मुर्गी/बत्तख आधारित पद्धति-

पशु/मुर्गी की कीमत का 50% अथवा अधिकतम रु. 25,000 प्रति हेक्टेयर अनुदान देय हैं।

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मीनीकिट:-

नवीनतम किस्मों के क्षेत्र विशेष में प्रचार-प्रसार हेतु विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दलहन, तिलहन, अनाज आदि फसलों के मीनीकट किसानों को वितरित किये जाते हैं।

मीनीकट की कीमत की 10% टॉकन राशि वसूल कर मीनीकट वितरित किये जाते हैं।

फसल प्रदर्शन:-

फसलों की नई एवं उन्नत किस्मों तथा शस्य क्रियाओं/तकनीकी के प्रचलन को बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न फसलों के प्रदर्शन कृषकों के खेत पर आयोजित किये जाते हैं।

  • आत्मा योजनान्तर्गत रु. 4000 प्रति प्रदर्शन 0.4 हेक्टेयर हेतु सहायता देय हैं।
  • नमूना योजना अंतर्गत मुगफली में 7500 रु., सोयाबीन में 4500 रु., अरंडी, अलसी एवं सरसों में 3000 रु. तिल में 1800 रु., व तारामीरा में 20990रु., तथा सरसों के साथ मधुमक्खी पालन पर 5000 रु., प्रति हेक्टेयर सहायता देय हैं।
  • रा. कृ. वि. यो. व राज्य योजना के तहत ग्वार में 6110 रु., गेहूं में 6610 रु. तथा मक्का व जौ में 5000 रु. प्रति हेक्टेयर सहायता देय है।
  • एन.एफ.एस.एम. योजनान्तर्गत खरीफ दलहन में 6710 रु, रबी दलहन में 7500 रु., गेहूं में 5000, बाजरा में 3600 रु, ज्वर में 3670 रु, तथा वाणिज्यिक फसल(कपास) में बीज व अन्य व्यवस्थाओं के लिए 7000 रु प्रति हेक्टेयर सहायता देय है।
  • मक्का के लिए रा. कृ. वि. यो. के अंतर्गत 5000 रु प्रति हेक्टेयर सहायता देय है।

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प्रमाणित बीज वितरण:-

कृषकों को गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध करवाने तथा बीज प्रति स्थापना करवाने तथा बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने के उद्देश्य से प्रमाणित / उन्नत बीज अनुदानित दरों पर उपलब्ध करवाया जाता है।

  • मुंग, उड़द, मोठ, चना, (राष्ट्रिय खाद्य सुरक्षा मिशन)
  • 15 वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 2500 प्रति क्विंटल जो भी कम हो।
  • मोटा अनाज बाजरा, ज्वार, मक्का, जौ (राष्ट्रिय खाद्य सुरक्षा मिशन/राष्ट्रिय कृषि विकास योजना)
  • 10 वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 5000 प्रति क्विंटल जो भी कम हो।
  • अन्य किस्में
  • दस वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 1500 प्रति क्विंटल जो भी कम हो।

गेहूं (राष्ट्रिय खाद्य सुरक्षा मिशन):-

10 वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 1000 प्रति क्विंटल जो भी कम हो।

ग्वार (राष्ट्रिय कृषि विकास योजना):-

दस वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 1200 प्रति क्विंटल जो भी कम हो।

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गेहूं एवं धान (राष्ट्रिय कृषि विकास योजना):-

10 वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 1000 प्रति क्विंटल जो भी कम हो।

तिलहनी फसलें:-

संकर किस्में (NMOOP):-

15 वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 5000 प्रति क्विंटल जो भी कम हो।

अन्य किस्में:-

15 वर्ष तक की अवधि की अधिसूचित किस्मों के बीज की कीमत का 50% अथवा रु 2500 प्रति क्विंटल जो भी कम हो। तिल हेतु उक्त अनुदान राशि 5000 रु प्रति हेक्टेयर है।

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पौध संरक्षण:-

आई. पी. एम. आधारित फार्मर फिल्ड स्कूल प्रक्षिक्षण -30 (NMOOP) कृषकों के प्रशिक्षण हेतु रु. 26700 सहायता।

हस्तचालित पौध संरक्षण उपकरण:-

NMOOP के तहत कीमत का 40 से 50% या अधिकतम रु 600 से रु 800 तक सहायता देय है। NFSM तहत कीमत का 50% या अधिकतम रु 600 प्रति उपकरण सभी श्रेणी के कृषकों के लिए।

  1. शक्ति चलित (नेपसेक पावर स्प्रेयर 16 लीटर से कम क्षमता वाले ) (NMOOP)
  2. कीमत का 50 से 60% या अधिकतम रु 3000 से रु 3800 तक सहायता देय है।
  3. शक्ति चलित (नेपसेक पावर स्प्रेयर 16 लीटर से कम क्षमता वाले ) (NMOOP)
  4. कीमत का 40 से 50% या अधिकतम रु 8000 से रु 10000 तक सहायता देय है।
  5. सीड ड्रेसिंग ड्रम(NMOOP) 20 किलोग्राम एवं 40 किलोग्राम
  6. कीमत का 50% या अधिकतम रु 1750 से रु 2000 तक सहायता देय है।

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फसलों में खरतवार नाशी / पौध संरक्षण रसायनों / बायो एजेंट पर अनुदान:-

NMOOP/राज्य योजना/NFSM(गेहूं/दलहन) योजनान्तर्गत कीमत का 50% या अधिकतम रु 500 प्रति हेक्टेयर जो भी कम हो, सहायता देय है।

ट्रेक्टर माउंटेड पौध संरक्षण उपकरण(NFSM):-

  1. कीमत का 50% या अधिकतम रु 10000 प्रति उपकरण सहायता देय है।
  2. शक्ति चलित (पावर स्प्रेयर कम डस्टर /बैटरी/सोलर ऑपरेटेड स्प्रेयर)
  3. NFSM (गेहूं/दलहन) योजनान्तर्गत कीमत का 50% या अधिकतम रु 500 प्रति उपकरण सहायता देय है।

मुख्यमंत्री बीज स्वालम्बन योजना:-

  1. किसानो द्वारा स्वयं के उपयोग हेतु उनके खतों पर गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन किये जाने के उद्देश्य से यह योजना क्रियान्वित की जा रही है।
  2. इसके तहत गेहूं, ज्वार, सोयाबीन, मुंग, एवं उड़द फसलों की उन्नत किस्मों का बीज उत्पादन लिया जायेगा।
  3. चयनित कृषकों को आधार / प्रमाणित बीज उपलब्ध करवाया जायेगा
  4. कृषकों को उन्नत बीज उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जायेगा।
  5. इस योजना में उदयपुर, भीलवाड़ा, एवं कोटा कृषि खण्डों के जिले शामिल है।

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तारबंदी पर अनुदान:-

  • फसलों को आवारा/जंगली पशुओं के नुकसान से बचने के लिए तारबन्दी पर अनुदान
  • अधिकतम 400 मीटर की सीमा तक लागत का 50% या अधिकतम राशि रु 4000 जो भी कम हो अनुदान देय है।
  • 400 मीटर से कम की लम्बाई की तारबन्दी पर अनुदान राशि की गणना अनुपातिक आधार पर की जाएगी।

कृषि यंत्रीकरण:-

योजना/गतिविधि NFSM NMOOP/SMAM
यंत्रीकरण ट्रैक्टर/पावर ऑपरेटेड यंत्र सभी श्रेणी के

कृषक

हॉर्स पावर रेंज SC/ST/लघु/सीमांत व महिला कृषक सामान्य कृषक

सीड ड्रिल /सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 से रु 4,000 जो भी कम हो मूल्य का 40% या अधिकतम रु 12,000 से रु 35,000 जो भी कम हो

डिस्क प्लाऊ/डिस्क हैरो

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 से रु 4,000 जो भी कम हो मूल्य का 40% या अधिकतम रु 12,000 से रु 35,000 जो भी कम हो

रोटावेटर

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 35,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 35,000 से रु 63,000 जो भी कम हो मूल्य का 40% या अधिकतम रु 28,000 से रु 50,000 जो भी कम हो

मल्टी क्रॉप थ्रेशर

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 40,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 20,000 से रु 63,000 जो भी कम हो मूल्य का 50% या अधिकतम रु 16,000 से रु 50,000 जो भी कम हो

ट्रैक्टर ऑपरेटेड रिपर (N.M.O.P.से स्वीकृत नहीं )

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 30,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 से रु 44,000 जो भी कम हो मूल्य का 50% या अधिकतम रु 12,000 से रु 50,000 जो भी कम हो

रिज फरों प्लांटर

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 से रु 63,000 जो भी कम हो मूल्य का 50% या अधिकतम रु 12,000 से रु 50,000 जो भी कम हो

मल्टी क्रॉप प्लांटर

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 15,000 से रु 63,000 जो भी कम हो मूल्य का 50% या अधिकतम रु 12,000 से रु 50,000 जो भी कम हो

चिजलर /चीजलर प्लो (N.M.O.P.से स्वीकृत नहीं )

मूल्य का 50% या अधिकतम रु 8,000 जो भी कम हो 20 बी.एच.पी. से कम की क्षमता से 35 बी.एच.पी. से अधिक क्षमता तक मूल्य का 50% या अधिकतम रु 8,000 से रु 10,000 जो भी कम हो मूल्य का 50% या अधिकतम रु 6,000 से रु 8,000 जो भी कम हो

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कृषक पुरस्कार (आत्मा योजना/राज्य योजना):-

राज्य स्तरीय (2 कृषक) 50,000 जिला स्तरीय (64 कृषक) रु. 25,000 पंचायत स्तर पर (552 कृषक) 10,000 एवं जैविक खेती पुरस्कार (3 कृषक) 1,00,000 प्रति कृषक देय है।

कृषक सेवाएं आपके द्वार:-

कृषि विभाग द्वारा आम जन एवं कृषकों के हित में राष्ट्रिय ई-गवर्नेन्स योजना के तहत निम्नांकित सेवाओं हेतु ई-मित्र पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकर किये जाते है। फार्मपोंड, डिग्गी, जल होज, पाइप लाइन, फव्वरा एवं कृषि यंत्रों के आवेदन, नवीन अनुज्ञापत्र एवं नवीनीकरण आवेदन, कृषि संकाय में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन हेतु छात्रवृति के लिए आवेदन।

उपयोगी वेबसाइट /पोर्टल:-

ई-मित्र emitra.rajsthan.gov.in

  • आवेदन पर हुई कार्यवाही की प्रगति की जानकारी भी ई-मित्र पोर्टल से ऑनलाइन ली जा सकती है।
  • यह पोर्टल नागरिकों/ ई-मित्र/ सी.एस.सी./ राजकीय उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रयोग किया जा सकता है।
  • आवेदक ई-मित्र पोर्टल द्वारा निर्धारित शुल्क ऑनलाइन भुगतान कर ई-प्रपत्र भर कर एवं सहायक दस्तावेजों को अपलोड /जमा कर सकता है।

अनुदान पात्रता के लिए कृषक स्वयं के नाम भूमि जमाबन्दी की नकल, फोटो, बैंक की पासबुक की छायाप्रति, आधार/भामाशाह कार्ड, लाइट बिल की प्रति आदि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार आवेदन करे।

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Bheru Lal Gaderi

नमस्ते किसान भाइयों मेरा नाम भेरू लाल गाडरी है। इस वेबसाईट को बनाने का हमारा मुख्य उद्देश्य किसान भाइयों को खेती-किसानी, पशुपालन, विभिन्न कृषि योजनाओं आदि के बारे में जानकारी प्रदान करना है।