फलों की खेती बागवानी

चीकू की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

चीकू की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक
Written by Vijay Dhangar

चीकू कटिबंधीय क्षेत्र का फल है। चीकू का पका फल स्वादिष्ट तथा कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्त्रोत है व इसका प्रयोग खाने में जैम और जेली बनाने में किया जाता है।

जलवायु एवं भूमि

इसकी खेती सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती हैं। परंतु गहरी उपजाऊ तथा बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए उपयुक्त है। इसकी सफल खेती के लिए गर्म और नम मौसम की आवश्यकता होती है। गर्मी में इसके लिए उचित पानी देने का प्रबंध करना आवश्यक है।

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उन्नत किस्में

काली पत्ती

फल अंडाकार, रसीले, सुगंधित, मीठे एक से चार बीज वाले होते हैं। फल शीत ऋतु में पकते हैं। यह अधिक पैदावार देने वाली गुजरात की किस्म हैं।

क्रिकेट बॉल

बहुत बड़े आकार के गोलाकार फल, गुदा सख्त व दानेदार परन्तु बहुत मीठा होता है। यह अपेक्षाकृत कम उपज देने वाली किस्म हैं।

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प्रवर्धन

इसका पौधा वानस्पतिक प्रवर्धन भेट कलम, विनियर ग्राफ्टिंग तथा सोफ़्टवुड ग्राफ्टिंग द्वारा तैयार किया जाता है। मूल वर्णत के लिए खिरनी के बीज वाले पौधे प्रयोग में लाए जाते हैं। ये कार्य अगस्त- सितम्बर में किया जाता है।

पौध लगाने की विधि

चीकू के पौधे जुलाई-अगस्त में लगभग 9×9 मीटर की दूरी पर लगाए जाते हैं। इसके लिए 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोदकर उसमें 20 किलो गोबर की खाद, 1 किलो सुपर फास्फेट व 50 से 100 ग्राम क्यूनालफॉस को 1.5 प्रतिशत चूर्ण में मिलाकर भर देना चाहिए। शुरू के दिनों में तेज धूप एवं ठंडक से पौधों की रक्षा करना आवश्यक है।

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खाद एवं उर्वरक

फसल की अच्छी पैदावार एवं बढ़वार के लिए खाद एवं उर्वरक निम्नानुसार देवे।

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति पौधा किलोग्राम में

एक वर्ष

दो वर्षतीन वर्षचार वर्ष

पांच वर्ष के बाद

गोबर की खाद (किलो)

15

304560

75

यूरिया (ग्राम)

0.500.751.001.50

1.50

सुपर फास्फेट (ग्राम)

0.25

0.50

म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (ग्राम)0.250.500.751.00

1.25

खाद व उर्वरक देने का समय बरसात से पूर्व जून माह में यूरिया की आधी मात्रा को छोड़कर सभी नाली बनाकर देवें तथा शेष यूरिया सितंबर- अक्टूबर माह में देवें।

सिंचाई एवं अन्तरसस्य

छोटे पौधों को विशेष रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है। लेकिन पौधों के पास पानी नहीं ठहरना चाहिए। गर्मियों में 7 से 10 दिन पर तथा सर्दियों में 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। प्रारंभ के 3 वर्ष तक बाग में सब्जियां जैसे मटर, चोला, ग्वार, मिर्च, बैंगन, हल्दी, रतालू आदि ली जा सकती है।

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पौध संरक्षण

कीट प्रबंध

चीकू का पतंगा

इस पतंगे की पहली जोड़ी के पंखों का रंग काला होता है तथा आधे भाग पर पीले रंग के धब्बे होते हैं। इसकी लट्टो का रंग गहरा गुलाबी होता है तथा पूरे शरीर पर लंबे काले रंग की धारियां होती है। यह कीट पतंगों का गुच्छा बनाकर उसमें रहता है। पत्तियों, कलियों एवं नए पौधों में छेद करके नुकसान पहुंचाता है।

नियंत्रण हेतु क्यूनालफॉस (25 ई.सी.) 2.0 मिलीमीटर या मोनोक्रोटोफॉस (36ई.सी.) 1.0 मिलीलीटर प्रतिलीटर पानी की दर से छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार यह छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर दोहरावें।

थ्रिप्स

यह कीट बहुत छोटे आकार के काले रंग के होते हैं। यह कोमल तथा नई पत्तियों का हरा पदार्थ खुरचकर खाते हैं जिससे पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं। पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती है।

नियंत्रण हेतु पौधों पर फॉस्फोमिडॉन (85 एस.एल.) 0.5 मिलीलीटर या डाईमिथोएट (30 ई.सी.) 1.5 मिलीलीटर या इमिडाक्लोरोपीड 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर या मोनोक्रोटोफॉस (36 एस.एल.) 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

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व्याधि प्रबंधन

पट्टी धब्बा रोग

इस रोग के प्रकोप से पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बे बन जाते हैं। उनकी वजह से उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

नियंत्रण हेतु जाइनेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो यह छिड़काव 15 दिन बाद दोहरावें।

शाखाओं का चपटा होना

यह समस्या कवक से होती है तथा रोग से प्रभावित वृक्षों की शाखाएं चपटी हो जाती है ऐसी शाखाओं को जला देना चाहिए।

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तुड़ाई एवं उपज

चीकू का पेड़ तीन चार साल बाद फल देने लग जाता है। जो फल गर्मी में तैयार होते हैं वे अधिक मीठे होते हैं। विकसित पेड़ से 150 से 200 तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। चीकू के फलों का छिलका जब भूरे रंग का हो जाए और जब उसमें पपडियां पड़ने लग जाए तो समझना चाहिए कि फल तोड़ने लायक हो गया है। कच्चे फलों को यदि नाख़ून लगाया जाए तो हरे निशान की जगह पीला निशान दिखाई दे तो ही पल पका माना जाए।

फलों को पकाना

चीकू के फलों को पकाने के लिए 1 मिली. इथरल प्रति लीटर पानी (1000 पी.पी.एम.) कि दर से घोल बनाकर 1 मिनट तक डुबो कर बंद कमरे में रखने से 24 घंटे में फल पक जाता है।

प्रस्तुति:-

कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अधिकरण (आत्मा), चित्तौड़गढ़

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