कृषि यंत्र

छिड़काव यंत्र (स्प्रेयर) का उपयोग एवं देखभाल

Written by Bheru Lal Gaderi

पौध संरक्षण के लिए उपयोगी छिड़काव यंत्र एवं उनकी देखभाल:-

कृषि प्रधान देश भारत के कुल कार्यशील जनसंख्या का लगभग 70% भाग कृषि व्यवसाय में संलग्न है। आज कृषि उत्पादन बढ़ाने में जैसे-जैसे नहीं विधियों का समावेश किया जा रहा है। वैसे ही नए यंत्रों (उपकरणों) का भी कृषि कार्यों को करने में समावेश हो रहा है।

पौध छिड़काव यंत्र

जिनमें पौध सरक्षण यंत्रों का प्रमुख स्थान हैं। पौध संरक्षण यंत्रों में मुख्यतः छिड़काव (स्प्रेयर) व भुरकाव (डस्टर) यंत्र आते हैं, जो पौधों को विभिन्न प्रकार के हानिकारक रोगों व कीटों से बचाते हैं।

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प्रमुख पादप संरक्षण यंत्र निम्न है:-

छिड़काव यंत्र (स्प्रेयर):-

पादप संरक्षण यंत्रों में छिड़काव आमतौर पर अधिक प्रचलित है। आजकल कई कंपनियां इन्हे बनाती हैं। जिन्हें सुविधा अनुसार निम्न प्रकार से वर्गीकृत कर सकते हैं।

कम तथा मध्यम आयतनी छिड़काव यंत्र:-

इन छिड़काव यंत्रों में प्रयुक्त घोल की मात्रा या पानी की मात्रा कम होती हैं जो कि सीमांत या मध्यम जोत धारक किसान हेतु आदर्श उपकरण हैं।

भारत में 70% किसान इसी श्रेणी में आते हैं। इसमें मुख्य हैं:-

हैण्ड कंप्रेशन स्प्रेयर:-

 

छिड़काव यंत्र

यह 3 से 5 लीटर की क्षमता तक का होता है। जिसमें उपयोगकर्ता हाथ से दाब उत्पन्न करता है। यह मुख्यतः नर्सरी तथा फूलों के बगीचे में छिड़काव के लिए उपयोगी है।

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हस्त चलित न्यूमेटिक टाइप:-

छिड़काव यंत्र

कम आयतनी छिड़काव यंत्र की क्षमता 1050 सी.सी. क्षमता का होता हैं। इसके सभी भाग ब्रास (काँसे) के बने होते हैं। यह मुख्यत घरेलू कीड़े मकोड़े मारने के काम आता है।

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बेबी स्प्रेयर:-

छिड़काव यंत्र

450 सी.सी. क्षमता युक्त यह कम  आयतनी यंत्र जिसके सभी भाग ब्रास के बने होते है। जिन पर क्रोमियम की परत का अस्तर लगा होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से   नर्सरी, घरेलु कीड़े मारने व किचन गार्डन में किया जाता है।

नेपसेक स्प्रेयर:-

छिड़काव यंत्र

धातु या प्लास्टिक का 16 लीटर क्षमता के इस स्प्रेयर को लादने हेतु 2 सोल्डर स्ट्रैप  लगभग 110 सेमी लंबाई के लगे होते हैं। कम आयतन तथा अधिक दाब सिद्धांत पर कार्यशील इस स्प्रेयर एक दिन में   से 1 दिन में 0 क्षेत्र में छिड़काव कर सकते हैं, जो कि विभिन्न फसलों के छिड़काव में प्रयुक्त होता है।

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पाँव चालित स्प्रेयर या फुट स्प्रेयर:-

नेपसेक स्प्रेयर

ये स्प्रेयर माध्यम से अधिक आयतनी समूह में आते हैं। जिनमें दो चालकों की आवश्यकता पड़ती हैं। दाब उपकरण भाग अलग होता है। जिसमें पैर से धकेलने पर उत्पन्न दाब निकासी दर को प्रभावित करता है।

इसमें निकासी होज लंबा (8 मीटर लंबाई) जो कि लॉस तथा नोजल से जुड़ा होता है।  यह मुख्यतः लंबे ऊंचे पेड़ों में छिड़काव में प्रयुक्त होता है। निकासी होज की लंबाई 8 मीटर 100 मीटर तक होती हैं तथा प्रयुक्त नोजल 3 एक्शन तरह का होता है। इसका उपयोग ऊंचे लंबे पौधों में छिड़काव हेतु होता है।

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रॉकिंग स्प्रेयर:-

नेपसेक स्प्रेयर

मध्यम आयतनी स्प्रेयर जिसकी सरंचना आम स्प्रेयर की तरह होती हैं, पर इनमें होज की लंबाई 15 मीटर तथा एक्टेंशन रोड की लंबाई 90 मीटर तक या फसल के अनुसार बढ़ा सकते हैं। उपयोग मुख्यतः बागवानी फसलों में छिड़काव में प्रयुक्त होता है।

स्ट्रीअप पंप:-

नेपसेक स्प्रेयर

मध्यमा आयतनी आम प्रकार का यह छिड़काव यंत्र जिस में प्रयुक्त नोजल फ्लैट फैन प्रकार का होता है। इसका उपयोग मुख्यतः शाक, कपास, अंगूर के बगीचे तथा अन्य बागवानी फसलों में छिड़काव के काम आता है।

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अधिक आयतनी छिड़काव यंत्र

पावर स्प्रेयर:-

पावर स्प्रेयर

एक ट्राली से छिड़काव व टेंक स्टील से बना होता है जो कि गेलवेनाइज्ड किया हुआ होता है। सभी भाग 1 स्टील पाइप से बने चेचिस पर लगे होते हैं। पावर सप्लाई हेतु 3/4 हॉर्स पावर की मोटर जुड़ी होती हैं।

उपयोगिता के अनुसार यह दो प्रकार के होते हैं।

  1. पक्तिबद्ध फसलों के छिड़काव में प्रयुक्त पावर स्प्रेयर
  2. चाय बागान, रबर बागानों तथा गन्ने के खेतों में प्रयुक्त पावर स्प्रेयर

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भुरकाव यन्त्र (डस्टर):-

हैंड रोटरी डस्टर (हस्त चलित डस्टर):-

छिड़काव यंत्र

यह सस्ता हाथ से आसानी से चलने वाला भुरकाव यंत्र हैं जिसे चालक कंधे या पेट पर टांग कर उपयोग में लेता है। इसका उपयोग विभिन्न रोगों की रोकथाम हेतु रसायनों के भुरकाव में होता है।

इसे उपयोगिता के अनुसार निम्न दो भागों में बांटा जा सकता है।

  1. शोल्डर माउंटेड
  2. कंपैक्ट टाइप

उपरोक्त दोनों ही डस्टरों का निर्माण ब्रास या एल्युमिनियम धातु से होता है। जिनमें लॉस (1 ) में छोटी होती हैं परंतु (2) में सुविधा अनुसार लंबाई दे सकते हैं। इसमें कटिंग फैन तथा गियरों की सहायता से भुरकाव रसायन छोटे-छोटे कणों के रूप में निकलता है।

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प्लंजर डस्टर:-

यह एक क्षेतीज सीधा हस्त चलित भुरकाव यंत्र हैं जो कि ब्रास से बना होता है। इसका उपयोग मुख्यतः बगीचे, खेतों तथा भंडार ग्रह में भुरकाव हेतु करते हैं।

पावर डस्टर:-

छिड़काव यंत्र

बड़े पैमाने पर बुरकाने में यह प्रयुक्त होते हैं। इनमें स्टील पाइप चेचिस पर रखा डस्टर एक पावर सप्लाई से जुड़ा होता है। टैंक की क्षमता (हॉपर क्षमता) 24,000 सी.सी. तथा निकासी पर 200 ग्राम से 2250 ग्राम प्रति मिनट, जिसके लिए लगभग 7000 से 8000 घूर्णन प्रति मिनट आवश्यक होता है।

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विशेष यंत्र मोटराइज्ड नेमसेक मिस्ट ब्लोअर कम डस्टर:-

यहां यंत्र छिड़काव के साथ साथ बुरकाव का काम करता है तथा पावर सप्लाई हेतु 3 हॉर्स पावर की मोटर जुड़ी होती हैं। विभिन्न फसलों में कीड़े, रोग या अन्य नुकसान दायक जीवो की रोकथाम में इसका उपयोग होता है।

फ्लेम गन:-

छिड़काव यंत्र

कम आयतनी स्प्रेयर की तरह 8 लीटर क्षमता वाले स्टील टैंक के साथ अन्य भाग एयर चार्ज पंप, एक सोल्डर स्ट्रिप, 1.5 मीटर लंबी सप्लाई होज तथा स्टील कोयल बर्नर लगा होता है। यह बर्नर ताप विकिरण उत्सर्जित करता है जो कि विभिन्न प्रकार के कीड़ों तथा खरपतवार उन्मूलन में सक्षम हैं। मुख्य उपयोग की रोकथाम तथा खरपतवार उन्मूलन में हैं।

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सायनो गैस पंप:-

यह धूम्रक यंत्र का काम करता है, जिसमें प्रयोग विषाक्त रसायन चूहा, चीटियों के बिलों या अन्य कीटों के आवास स्थलों पर सीधे डालकर उन्हें नष्ट किया जा सकता है। उपयोग में लिए रसायनों से निकली एचसीएल गैस उपरोक्त जीवो को मार देती हैं।

देखभाल एवं सावधानियां:-

फसलों को कीड़ों व बीमारियों से बचाने के लिए विभिन्न दवाओं कीटनाशकों का प्रयोग बहुत ही आवश्यक हो गया है। परंतु बहुत अधिक महंगी एवं जहरीली होने के कारण इन दवाओं कीटनाशकों के नियंत्रण एवं प्रभावी प्रयोग में छिड़काव यंत्र (स्प्रेयर) एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

यदि उचित रखरखाव एवं सावधानियां सही समय पर की जाए तो आपको छिड़काव यंत्र से काम लेने में कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी।

छिड़काव यंत्र का रखरखाव:-

कार्य समाप्त होने पर यंत्र में साफ पानी डालकर कुछ देर चलाएं उसके पश्चात उसे अच्छी तरह धोकर रखें। इंजन बंद करने से पहले दबाव नियंत्रक को घुमा कर दबाव शून्य पर कर दें।

उपयोग के बाद यंत्र के सभी खुलने वाले पुर्जो को धोकर एवं तेल लगाकर रखे। यंत्र को बताए गए दबाव से अधिक दबाव पर ना चलाएं। कार्य आरंभ करने से पहले यंत्र के सभी नॉजलों (छिद्रों) को अच्छी तरह से साफ करें। यंत्र के टैंक को कीटनाशक गोल से पुराना भरें।

यंत्र के उपयोग के समय सावधानियां:-

यंत्र प्रयोग करते समय हाथ, नाक व मुंह पर अच्छी तरह कपड़ा बांधे। पानी की धार को विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्थिर करें।

अच्छे परिणाम के लिए छिड़काव करने से पहले कोई चिपकने वाला पदार्थ साबुन का घोल कीटनाशक के घोल में डालें ताकि कीटनाशक जमीन पर व्यर्थ गिरने के बजाय पौधों पर चिपक जाए।

तेज हवा में, हवा के विपरीत दिशा में अथवा अधिक धूप में छिड़काव ना करें। घोल  बनाते समय कीटनाशक एवं पानी की सही मात्रा का प्रयोग करें। इंजन चालक यंत्र के नॉजलों के बीच की दूरी फसल की लाइन से लाइन की दूरी के हिसाब से स्थिर करें। नोजल रुकने पर उसे तुरंत ठीक करें। यंत्र के नट बोल्ट अधिक ढीले व टाइट न करें।

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प्रस्तुति:-

योगेंद्र शर्मा ग्राम ढाबावाली, श्रीमाधोपुर सीकर,

दीपक कुमार सुरोलिया शोध छात्र उद्यान विभाग श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय

जोबनेर-  303329

 

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Bheru Lal Gaderi

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