पशुपालन

गर्मियों में दुधारू गायों का पोषण प्रबंधन

Written by Vijay Dhangar

दुधारू गायों का दुग्ध उत्पादन बहुत कुछ आहार पर निर्भर करता है। यह प्रमाणित तथ्य है कि यदि पशुओं को संतुलित आहार दिया जाए तो उनका दूध उत्पादन 50% तक बढ़ सकता है। विशेष रूप से गर्मियों में दुधारू गायों को ऐसा आहार देना चाहिए जिससे पशु के शरीर में कम से कम ऊर्जा पैदा हो। अक्सर देखा गया है कि गर्मियों में दुधारू गायों को खिलाने के लिए प्रायः ज्वार, बाजरा या मक्का का हरा चारा उपलब्ध होता है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि दुधारू गायों को केवल हरा चारा दाना मिश्रण ही देना चाहिए।

गर्मियों में दुधारू गायों का पोषण प्रबंधन

इसलिए कि पशु के पेट में हरे चारे से एसिटिक, प्रोपियोनिक अम्ल के अनुपात में कमी आती हैं, और इससे पशु के शरीर में गर्मी कम पैदा होती है। दाना मिश्रण में उन दानों का प्रयोग करें जिससे कि प्रोपियोनिक अम्ल अधिक पैदा हो, इसके लिए जो के दाने प्रमुख है। तिलहन की खली का प्रयोग नहीं करें। दुधारू गायों को दाना ,चारा 40:60 के अनुपात से दें।

प्रोटीन

जीवन के लिए कोई भी योगिक इतना अवश्य नहीं है जितना कि प्रोटीन है। अगर दुधारू गायों के राशन में प्रोटीन की मात्रा की कमी हो तो दूध उत्पादन तुरंत प्रभावित होता है। अगर बछड़ी को अधिक कच्चा प्रोटीन वाला आहार दिया जाता है तो उसकी पहली बार गर्भधान की दर कम होगी (24.1 से 41.09%) वनस्पति मेडरेट कच्ची प्रोटीन युक्त आहार खिलाने से गाय के रक्त में यूरिया और अमोनिया की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिसके फलस्वरूप गर्भ धारण करने की क्षमता प्रभावित होती है।

गर्मियों में अधिक प्रोटीन युक्त राशन खिलाने से, गर्मियों में जो शुष्क चारा कम खाया जाता है, उसकी पोषण की दृष्टि से कमी पूरी हो सके। सामान्यतया राशन में 18% या कम होनी चाहिए।

भारत में किए गए अनुसंधान के अनुसार दूध में प्रति 100 ग्राम स्त्रावित होने वाली प्रोटीन के लिए लगभग 130 से 160 ग्राम प्रोटीन देना आवश्यक होगा ताकि भोजन के पाचन के उपरांत होने वाली ऊष्मा कम से कम पैदा हो।

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वसा

दुधारू गायों के लिए राशन परिकलित करते समय अनुक्षरण  की आवश्यकताओं के अतिरिक्त पोषक तत्व दुग्ध उत्पादन के भत्ते के रूप में देने होंगे। एक बात जो ध्यान देने की है वह दूध देने वाली गायों में अनुक्षरण के लिए ऊर्जा की आवश्यकता दूध देने वाली गायों की अपेक्षा 15 से 20% तक अधिक होती है। आहार में 5 से 6% तक वसा होने चाहिए इसके लिए कपास की खल प्रयोग की जाए (12 से 15%)।

खनिज मिश्रण

गर्मियों के समय में खनिज, पसीने या अन्य रूप में शरीर से आसानी से बाहर निकल जाते हैं, फलस्वरुप उनकी कमी हो जाती है। इसलिए गर्मियों का समय शुरू होने से पहले राशन में खनिज मिश्रण की मात्रा सामान्य से अधिक होनी चाहिए, जैसे कि पोटेशियम की मात्रा 1.3 से 1.5%, सोडियम की मात्रा 0.5 से 0.6% तथा मैग्नीशियम की मात्रा 0.3 से 0.4% तक बढ़ा कर देनी चाहिए ताकि जब जरूरत हो तब आसानी से खनिज लवण की मात्रा की पूर्ति हो सके। क्लोरीन की मात्रा पूरे साल 0. 25% रहनी चाहिए।

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विटामिन

अधिकतर वैज्ञानिक मानते हैं की आहार में विटामिन की बढ़ती हुई मात्रा गर्मियों के समय देना चाहिए। अगर पशुपालक 1000 इंटरनेशनल यूनिट विटामिन-ए, 50000 विटामिन-डी और 500 विटामिन-ई देते रहे तो मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। जितनी विटामिन-डी की आवश्यकता होती है, उतनी सूर्य की रोशनी से बना लेती हैं, इसलिए अतिरिक्त देने की आवश्यकता नहीं है। इसी तरह गाय को ताजा हरा दिया जा रहा हो तो अतिरिक्त विटामिन-ई देने की आवश्यकता नहीं हैं।

भोज्य योग्य पूरक

ऐसे अवयव या अवयवों का मिश्रण जोकि आधारीय भोज्य में मिश्रित किए जाते हैं या उनका भाग बनाकर एक विशिष्ट आवश्यकता की पूर्ति करते हैं। आमतौर पर यह बहुत ही सूक्ष्म भाग में उपयोग किए जाते हैं। उदाहरण स्वरुप सोडियम बाइकार्बोनेट, जब गाय केवल सूखे चारे पर निर्भर हो तब 0.4% या 5 से 6  औंस प्रति गाय खिलाया जाए तो दूध में वसा की मात्रा को कायम रखते हैं। ईस्ट कल्चर और फफूंद से बने उत्पादों को गाय के आहार में शामिल किया जाता है तो गर्मियों में लाभदायक होता है।

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गर्मियों में दुधारू गायों  की खिलाई- पिलाई के आधारभूत सिद्धांत-

  • जहां तक संभव हो सके शाम के वक्त ही अपने पशुओं को हर चारा खिलाएं, इससे ऊर्जा की हानि कम से कम हो और अधिकतम ऊर्जा दुग्ध उत्पादन में काम आ सके।
  • दुधारू गाय के आहार में दाना, चारा का अनुपात 40:60 हो।
  • ताजा कटा हुआ चारा या साइलेज गायों को खाने के लिए दे।
  • उच्च कोटि के चारे की प्राप्ति ठीक समय पर करने से लक्ष्य 60-63 प्रतिशत युक्त पाचक तत्व हरे चारे में हो।
  • अधिक द्विदलीय चारे से आहार में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना। लक्ष्य-चारे के पदार्थ पदार्थ में 13-14% प्रोटीन का होना।
  • दाना मिश्रण में नमक का 2% प्रयोग करें।
  • गर्मियों में अपने पशुओं को कम से कम 3 बार पानी अवश्य पिलाएं, दूध में भी 85% पानी होता है। दूध देने वाले पशुओं के तो अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
  • खिलाई -पिलाई क्रम को आर्थिक आधार पर निर्धारित करना।
  • जहां तक संभव हो सके, जहां तक संभव हो सके गाय को छायादार स्थान पर ही बांधे।

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प्रस्तुति

पंकज लवारिया, विषय विशेषज्ञ (पशुपालन),

कृषि विज्ञान केंद्र, दांता, बाड़मेर(राज.)

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