खाद्य पदार्थ (Food Processing) खेती-बाड़ी

मधुमक्खी पालन अपनाकर इंजीनियर आकाश बने किसान

मधुमक्खी पालन
Written by Bheru Lal Gaderi

ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि खेती करना गाँव के लोगों का ही काम है। अधिकतर ग्रामीणों में भी ये धारणा है कि घर का जो व्यक्ति कुछ नहीं कर रहा है वो खेती करेगा और घर के पढ़े-लिखे लोग शहर जाकर नौकरी करेंगे, यही कारण मुख्यतः गाँव से शहर की ओर पलायन का कारण बनता है। परंतु वर्तमान में खेती की नई तकनीकों का प्रयोग कर शहर के पढ़े-लिखे युवा भी गाँव की ओर चलकर खेती से जुड़ रहे हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे ही एक युवा की जिन्होंने न सिर्फ प्रोफेशनल डिग्री हासिल की है बल्कि कई साल बड़ी कम्पनियों में नौकरी भी की है, पर अंततः सब कुछ छोड़कर आज खेती से जुड़ गए हैं और व्यवसायिक रूप से मधुमक्खी पालन (Beekeeping) कर रहे हैं।

मधुमक्खी पालन

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शहद ने घोली आकाश के जीवन में मिठास:-

बैतूल के रहने वाले आकाश वर्मा ने इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। इंजीनियर बनने के बाद आकाश ने 2 साल सिस्का एवं 2 साल वीवो जैसी नामचीन कम्पनी में काम भी किया पर आकाश का मन तो इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया से हटकर कुछ नया करना चाह रहा था, पर दिमाग समझ नहीं पाया था कि जाना किधर है?

नौकरी के दौरान एक बार अपने गृहग्राम बैतूल में छुट्टियों के दौरान आये आकाश यूँ ही दोस्तों के साथ उद्यानिकी विभाग द्वारा मधुमक्खी पालन पर आयोजित प्रशिक्षण में भाग लेने पहुँच गए। प्रशिक्षण में मधुमक्खी पालन से होने वाले लाभ से आकाश इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने मधुमक्खी पालन की एडवांस ट्रेनिंग करने की ठान ली। अब आकाश समझ चुके थे कि उन्हें भविष्य में करना क्या है।

पुणे से लिया मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण:-

जल्द ही आकाश ने पूणे से मधुमक्खी पालन का 15 दिन का सघन प्रशिक्षण लिया और फिर नौकरी छोड़कर लग गए मधुमक्खी पालन करने। आकाश ने शुरुआत में अपने दोस्त आकाश मंगरुकर के साथ मिलकर मधुमक्खी के 15 डिब्बे अपने खेत में रखे और आधे एकड़ जमीन में मधुमक्खी पालन हेतु उपयुक्त विभिन्न फसलें उगाने लगे। मधुमक्खी पालन का पहला अनुभव होने के कारण शुरुआत में कुछ समस्यायें तो आई पर दोनों आकाश ने हार नहीं मानी और अंततः समय के साथ मधुमक्खियाँ आकाश की मित्र बन ही गई।

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पहली बार में निकाला 5 से 6 किलो शहद

लगभग 1.5 महीने में आकाश ने पहली बार मधुमक्खी के डिब्बों से शहद निकाला। पहली ही बार में आकाश की मेहनत रंग लाई और हर एक डिब्बे से लगभग 5 से 6 किलो शहद प्राप्त हुआ, जो आसानी से 300-350 रुपये किलो में बिक गया। डिब्बों से हर दो महीने में फिर शहद निकाला गया, इस तरह साल में 5-6 बार में शहद निकाला गया। इस तरह पहले ही साल में आकाश ने 15 डिब्बों से 10 महीने में कुल 500 किलो शहद बेचकर लगभग 1.5 लाख रुपये की आय प्राप्त की।

मधुमक्खी पालन खेती के साथ सहायक उद्योग:-

उपसंचालक उद्यानिकी, बैतूल डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार के अनुसार मधुमक्खी पालन खेती के साथ एक अच्छा सहायक उद्यम है जिसे अपनाकर किसान अतिरिक्त सुनिश्चित आय प्राप्त कर सकते हैं। मधुमक्खी पालन से शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली, प्रोपोलिस, पॉलिन एवं बी वैनम आदि सह उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, वहीं फसलों में परागण होने से फसल की उपज भी 20-25% ज्यादा प्राप्त होती है।

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खाद्य प्रसंस्करण के लिए अनुदान:-

मधुमक्खी पालन हेतु आकाश को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनान्तर्गत प्रति डिब्बा एवं छत्ता 1600 रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ है। उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित किसान समृद्धि बाजार के माध्यम से आकाश ने अपने फार्म में उत्पादित शहद का विक्रय किया, जिससे उनके शहद की मिठास का स्वाद बैतूल के आमजन ने भी उठाया। मधुमक्खी पालन से जुड़कर आकाश एक ओर जहाँ बहुत उत्साहित हैं वहीं दूसरी ओर भविष्य में 100-150 डिब्बे रखकर और बड़े स्तर पर मधुमक्खी पालन का कार्य व्यवसायिक रूप से करना चाहते हैं। आकाश जिले के अन्य किसानों/युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं तथा अन्य युवाओं को भी मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर इस उद्यम से जोड़ना चाहते हैं।

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स्रोत:- उद्यानिकी सन्देश-खेती में स्वच्छता अभियान

जय जवान-जय किसान-जय उद्यान

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Bheru Lal Gaderi

नमस्ते किसान भाइयों मेरा नाम भेरू लाल गाडरी है। इस वेबसाईट को बनाने का हमारा मुख्य उद्देश्य किसान भाइयों को खेती-किसानी, पशुपालन, विभिन्न कृषि योजनाओं आदि के बारे में जानकारी प्रदान करना है।