कीट व्याधि प्रबंधन जैविक खेती (Organic farming)

मित्र कीट जो फसलों की रक्षा करेंगे

मित्र कीट जो फसलों की रक्षा करेंगे
Written by Vijay Dhangar

प्रकृति में पाए जाने वाले अधिकतर किट हमारे दुश्मन ही है, अर्थात फसलों को बुवाई से लेकर कटाई तक की विभिन्न अवस्थाओं में नुकसान करते हैं। हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में इन दुश्मन कीटों के साथ- साथ जो इन हानिकारक कीटों को खाते हैं, या उन पर अपना जीवन यापन करते हैं। ऐसे किट मित्र कीट (Farmer’s Friend Pest) कहलाते हैं।

प्रकृति में जहां हजारों की संख्या में कीट है उनमें से लगभग 15 से 20% मित्र कीट भी है, इन मित्र कीटों की पहचान, संरक्षण एवं फसलों में उपयोग करके, हानिकारक कीटों, कीट रसायनों के जहर  तथा महंगाई की महामारी से छुटकारा पाया जा सकता है। हालाँकि शुरू में मित्र कीट को अपनाने में समस्या आती हैं लेकिन बाद में बाद में धीरे-धीरे अच्छा परिणाम मिलने लगता हैं। आइये जानते हैं इन मित्र कीट के बारे में –

लेडी बर्ड बीटल एक मित्र कीट

मित्र कीट जो फसलों की रक्षा करेंगे

साधारण भाषा में इसे लाल सुंडी भी कहते हैं। इसके प्रौढ़ का रंग लाल होता है जिस पर काले रंग के गोल निशान होते हैं। इस कीट के अंडे पीले चावल के दाने की तरह लंबे सिगार आकृति के होते हैं, मादा कीट 300 से 500 अंडे 5 से 10 समूह में पत्ती की ऊपरी सतह पर देती है। कीट के लार्वा गहरे काले भूरे रंग के हल्की धरी वाले होते हैं।

केट के प्रौढ़ एवं लार्वा दोनों ही कोमल शरीर वाले दुश्मन कीटों जैसे की हरा तेला, मोयला, थ्रिप्स, सफेद मक्खी आदि को खाते हैं तथा सुंडियों के अंडो को भी खाकर नष्ट कर देते हैं। प्रौढ़ एवं निम्फ दोनों लगभग 70 मोयला, 16 हरा तेला, तथा सुंडियों के 13 अंडे प्रतिदिन खाते हैं।

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क्राईसोपा एक मित्र कीट

ग्रीन लेस विंग भी कहते हैं। इसके प्रौढ़ के पंख पारदर्शी हरे रंग के होते हैं जिनकी आंखें गोल एवं सुनहरे रंग की होती है। प्रौढ़ कीट लगभग 300 से 500 अंडे साधारणतया पत्तियों, तना व शाखाओं के ऊपर स्थित रोम के ऊपर देती है। अंडे हल्के सफेद रंग के व अंडाकार होते हैं।

अण्डों में से 4 से 5 दिन में लार्वा निकलते हैं जो हल्के भूरे रंग के होते हैं तथा कोमल शरीर वाले दुश्मन कीटों जैसे हरा तेला, सफेद मक्खी, मोयला, थ्रिप्स आदि को बड़े चाव से खाते हैं। साथ ही साथ सुंडियों के अंडों एवं प्रथम अवस्था की लटों को भी खाते हैं। क्राइसोपा कीट का एक लार्वा लगभग 40 मोयला,15 हरा तेला, सुंडियों के 20 अंडे एवं 6 सुंडियों को प्रतिदिन खाता है।

मकड़ी

मुख्य रूप से फसलों में तीन से चार प्रकार की मकडिया देखने को मिलती है, जो बिजाई से लेकर कटाई तक सक्रिय रहती है। मकड़ी विशेष रूप से हरा तेला, सफेद मक्खी, मोयला, प्रथम अवस्था की लटों व अन्य कीटों को अपने जाल में फंसा कर या सीधे उन पर हमला कर उस को खा जाती हैं। मकड़ी लगभग 15 हरा तेला एवं 20 सफेद मक्खी प्रतिदिन खाती हैं।

डेल्टा कीट एक मित्र कीट

साधारण भाषा में इसे मिट्टी का बना भवरा भी कहते हैं। यह गहरे भूरे रंग का कीट है। इसकी गर्दन का आगे का हिस्सा पीले रंग का होता है। यह कीट हरी सुंडी तथा अन्य सुंडियों पर डंक मार के उन्हें निष्क्रिय बना देता हैं और फिर उन्हें अपने मिट्टी के घरों में ले जाकर अपने शिशुओं के लिए आहार के रूप में जमा कर देता है। एक डेल्टा कीट प्रतिदिन लगभग 8 से 10 सुंडियों का खेत से सफाया कर देता है।

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प्रार्थना कीट (प्रेइंग मेन्टिस)

इस मित्र कीट के प्रौढ़ का रंग हरा, आंखें गोल मोटी, आगे की टांगे बड़ी एवं दांतेदार होती है। यह परभक्षी कीट एक जगह बैठे-बैठे अपनी गर्दन चारों ओर घुमा लेता है। प्रौढ़ कीट की एक विशेष प्रकार के जलरोधी आवरण में अपने अंडे देता है यह कीट के निम्फ भी प्रौढ़ जैसे ही होते हैं पर उनका रंग काला होता है।

निम्फ कीट लगभग 1 वर्ष बाद प्रौढ़ अवस्था में बदल जाते हैं। निम्फ एवं प्रौढ़ दोनों ही कीटभक्षी होते हैं जो की विभिन्न प्रकार की लटों को खाते हैं।

पेंटाटोमिड बग एक मित्र कीट

सील्ड जैसी आकृति होने के कारण इसे सील्ड बग भी कहते हैं। प्रौढ़ कीट का रंग गहरा एवं हल्के पीले सफेद धब्बों युक्त होता है। यह कीट सभी प्रकार की लटों जैसे की हरी सुंडी, चितकबरी सुंडी, तम्बाकू की लट आदि को अपनी ओर आकर्षित कर अपने मुखंगों की सहायता से उनके शरीर का रस चूस कर उन्हें खत्म कर देता है। यह कीट प्रतिदिन लगभग 5 लटों को खाता है।

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रीडूविड बग

इस परभक्षी कीट का रंग गहरा काला एवं मुखांग नुकीला होता है। यह कीट अपने से बड़ी आकृति की सुंडियों को भी नियंत्रित करके उनका रस चूसकर उन्हें खत्म कर देता है। यह कीट लगभग 6 सुंडी हर रोज खाता है।

केराबिड अथवा ग्राउंड बीटल

यह कीट केटरपिलर हंटर भी कहलाता है। इस कीट का रंग लाल काला, शरीर लंबा, आंखें काली एवं मुख हल्के खाखी रंग का होता है। इस कीट के ग्रब तथा वयस्क अपने काटने चुभने वाले मुखगों की सहायता से प्रतिदिन लगभग 8 से 10 विभिन्न प्रकार की लटों को मारकर खा जाता है।

इन सब मित्र कीटों के अलावा भी कई मित्र कीट हैं जो प्रकृति में पाए जाते हैं जैसे कि ततिया, बेन्डेड कैटरपिलर, ब्रेकों, अपेंटेलिस, डेंसीस बग आदि है। इन सबके अलावा बहुत से पक्षी भी हमारे मित्र हैं, जैसे घरेलू चिड़िया, भारतीय मेना हरे या काले रंग की चिड़िया आदि जो कि हानिकारक कीटों की लटों एवं उनकी तितलियों को खाकर हमारी फसलों की रक्षा करती है।

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ऐसे करें मित्र कीटों का संरक्षण

  • मित्र कीट को संरक्षण देने वाली फसलें जैसे कि ज्वार, बाजरा, मक्का, चावल आदि को मेड़ों पर अवश्य लगाएं।
  • पक्षियों के बैठने के लिए जगह बनाएं इसके लिए थोड़ी- थोड़ी दूरी पर दो पोल गाड़ कर उन पर लोहे का तार बांध देवे या टी (T) के आकार की लकड़ियां खेतों में गाड़ देवे।
  • खेतों में पेड़ों के नीचे पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था अवश्य करें ताकि पक्षी घोंसला बना कर वही रहना शुरू कर दे।
  • लाइट ट्रेप को 2 घंटे शाम के समय व 2 घंटे सूर्योदय से पहले जलाए सारी रात नहीं क्योंकि रात को मित्र कीट भी लाइट की तरफ आकर्षित होकर मर जाते हैं।
  • लाइट ट्रेप के नीचे रखे टब में यदि मित्र ज्यादा संख्या में आ रहे हो तो लाइट ट्रैप का प्रयोग ना करें।
  • जहां तक संभव हो कीटनाशियों का छिड़काव कम करें एवं इ.टी.एल. देख कर ही छिड़काव करें।
  • ऐसे कीटनाशियों का चुनाव करें जो मित्र कीटों को कम से कम नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे वानस्पतिक कीटनाशक (एन.एस.के.ई., निम्बीसीडीन, करंज तेल, करंज के बीजों का सत, हतुरा से बना सत अदि)

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प्रस्तुति

रमेश कुमार साँप, जोधपुर

प्रेषक

कृषि भारती

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