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लीची की व्यवसायिक खेती का कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ

लीची की व्यवसायिक खेती
Written by Bheru Lal Gaderi

फलों के राजा आम के साथ अब फलों की रानी लीची से भी गुलजार होंगे बैतूल जिले के बगीचे
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सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ लीची की व्यवसायिक खेती का कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम
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फलों के राजा आम के लिए प्रसिद्ध बैतूल जिला अब फलों की रानी लीची के उत्पादन में भी अपना नाम रोशन करने जा रहा है। बैतूल पूरे प्रदेश में लीची की व्यवसायिक खेती करने वाला पहला जिला होगा। हाल ही में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बैतूल द्वारा 23 फरवरी को जिला पंचायत सभागृह में जिले के प्रगतिशील कृषकों का लीची की व्यवसायिक खेती संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलता पूर्वक आयोजन किया गया।

लीची की व्यवसायिक खेती

प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्‍ट्रीय लीची अनुसंधान केन्‍द्र, मुजफ्फरपुर (बिहार) से तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में डॉ. एस.डी. पाण्‍डे, प्रधान वैज्ञानिक तथा डॉ. कुलदीप श्रीवास्‍तव, वैज्ञानिक द्वारा लीची की खेती संबंधी समस्त तकनीकी सलाह किसानों को दी गई। इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, बैतूल श्री एम. एल. त्‍यागी विशेष अतिथि के तौर पर उपस्थित हुये।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रारम्भ में उपसंचालक उद्यान डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार द्वारा समस्‍त अतिथियों का स्‍वागत करते हुये जिले में आगामी वर्ष में प्रारम्भ किये जाने वाले लीची पौध रोपण अभियान के विषय में समस्त किसानों को लीची की व्यवसायिक खेती का महत्‍व बताया। उद्यानिकी विभाग द्वारा आगामी पाँच वर्षों हेतु निर्धारित विभागीय लीची पौध रोपण के प्रस्तावित कार्यक्रम की पूर्ति हेतु कृषकों को किसान उत्पादक कम्पनी बनाकर कार्य करने की सलाह दी गई।

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उन्‍नत खेती कर आगे बढ़े:-

उप संचालक उद्यान द्वारा आहवान किया गया कि किसान खेती को सिर्फ आजीविका का साधन न माने बल्कि एक उद्यम के रूप में उन्‍नत खेती कर आगे बढ़े। उपसंचालक उद्यान द्वारा यह भी अवगत कराया गया है कि उपरोक्त प्रशिक्षण उपरांत समस्त किसानों को लीची की व्यवसायिक खेती के प्रायोगिक अनुभव से रूबरू कराने के लिये जिले के प्रगतिशील कृषकों के प्रक्षेत्र में लीची के बगीचों का भ्रमण कराया जायेगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री एम एल त्‍यागी द्वारा कृषकों को परम्‍परागत खेती के अलावा उद्यानिकी की खेती को प्राथमिकता के तौर पर करने हेतु प्रोत्साहित किया गया एवं लीची उत्‍पादित करके बैतूल जिले को देश के लीची मानचित्र में स्‍थान दिलाने का आह्वान किया गया। श्री त्यागी द्वारा ये भी आश्वासन दिया गया कि किसान अपनी पूरी मेहनत करें जिला प्रशासन किसानों को हर सम्भव मदद करने हेतु सदैव तत्पर रहेगा।

प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस.डी. पाण्‍डे ने लीची से जुड़ी हुई सभी महवपूर्ण बातें, उसका इतिहास, पौध रोपण से संबंधित तकनीकी जानकारी, फसलोत्‍तर प्रबंधन, मार्केटिंग, लीची की माँग-पूर्ति, उत्‍पादक से उपभोक्‍ता तक विपणन श्रृंखला आदि पहलुओं के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई। तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप श्रीवास्‍तव द्वारा उपस्थित किसानों को लीची बागानों में आने वाले कीट, पंतगों, बिमारियों का समय-समय पर उपचार एवं देखरेख से संबंधित समस्‍त जानकारी कृषकों को प्रदाय की गयी।

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वैज्ञानिकों को द्वारा कृषकों को लीची के फसलोत्तर प्रबंधन एवं आर्थिकी की जानकारी देकर अवगत कराया कि केरल के एक किसान के द्वारा सिर्फ दो लीची के पेड़ों से प्रतिवर्ष 30 हजार रुपये खर्च कर 75 हजार की आय प्राप्त की जा रही है।

वैज्ञानिक द्वारा विभागीय नर्सरी एवं कृषकों के प्रक्षेत्र जहाँ पर लीची के कुछ पौधे लगे हुये है उन प्रक्षेत्र का भ्रमण कर उनका निरीक्षण किया गया। जिले में वर्तमान में लीची के पौधों में फूलों की बहार है और पौधों का आकार देखने के उपरान्‍त इनके द्वारा बताया गया कि बैतूल जिले की जलवायु एवं मृदा लीची की खेती के लिये उपयुक्‍त है यह बात प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं है ये पेड़ ही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है। साथ ही उनके द्वारा यह भी बताया गया कि यदि बैतूल जिले के कृषक लीची की खेती प्रारंभ करते है तो जिले की उत्‍पादित लीची बिहार की उत्‍पादित लीची से भी टक्कर ले सकती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में श्री संतोष इवने, वरिष्‍ठ उद्यान विकास अधिकारी द्वारा उपस्थित समस्त अतिथियों एवं कृषकों का आभार व्‍यक्‍त करते हुये जानकारी दी गयी कि इस वर्ष जुलाई में विभागीय योजना के तहत जिले के इच्छुक कृषकों के प्रक्षेत्रों में लीची के व्यवसायिक बगीचों का रोपण किया जाएगा, जिसके अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 150-200 पौधों का रोपण कराया जाएगा। इस हेतु विभाग द्वारा कृषकों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी जिसके तहत विभाग द्वारा कृषकों को उच्च गुणवत्ता युक्त पौधे प्रदान किये जायेंगे एवं ड्रिप संयंत्र स्‍थापना हेतु भी तकनीकी एवं वित्‍तीय सहायता प्रदान की जावेगी।

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लगभग 350 किसानों ने लिया प्रशिक्षण:-

उपरोक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के समस्‍त विकासखण्‍डों से लगभग 350 किसान उपस्‍थित हुये और उनके द्वारा ध्‍यानपूर्वक वैज्ञानिकों के द्वारा दिये गये लीची की तकनीकी की जानकारी प्राप्‍त की गयी। प्रशिक्षण उपरांत उपस्‍थित ज्यादातर कृषकों द्वारा जुलाई के महिने में लीची पौध रोपण हेतु अपनी सहमति भी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभाग के समस्‍त मैदानी अमले द्वारा भी लीची की व्यवसायिक खेती की बारीकियों का ज्ञान प्राप्त किया।

बैतूल जिले की जलवायु एवं मिट्टी लीची की खेती के लिये कितनी उपयुक्‍त है, वर्तमान में फलन पर आये लीची के पेड़ ही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यदि बैतूल जिले के कृषक लीची की व्यवसायिक खेती प्रारंभ करते है तो जिले की उत्‍पादित लीची बिहार की उत्‍पादित लीची से भी टक्कर ले सकती है।

डॉ. एस.डी. पाण्‍डे
प्रधान वैज्ञानिक
राष्‍ट्रीय लीची अनुसंधान केन्‍द्र, मुजफ्फरपुर (बिहार)

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Bheru Lal Gaderi

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