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शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष महत्व एवं उपयोगिता

शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष
Written by Bheru Lal Gaderi

शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष – Zero energy cooling chamber importance and utility:-

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पूसा शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष (Zero energy cooling chamber) निर्माण विधि का विकास किया गया है तो किसान भाइयों आइये जानते इस नवीनतम तकनीक के बारे में –

शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष

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पश्चिमी राजस्थान जहां ग्रीष्म काल के दौरान दिन का तापमान लगभग 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है एवं वातावरण में सापेक्ष आद्रता भी बहुत कम होती हैं। इन वातावरणीय परिस्थितियों में दैनिक उपयोग वाले उत्पाद जैसे दूध दही छाछ सब्जी आदि जल्दी खराब हो जाते हैं एवं उनमें पोषक तत्वों की प्रतिकूल प्रभावित कर गुणवत्ता को कम करके कमजोर संसाधनों वाले ग्रामीण परिवारों को प्रभावित करके आर्थिक नुकसान पहुंचता है।

पूर्वी राजस्थान के रेगिस्तानी ग्रामीण इलाकों में बिजली की बाधित आपूर्ति, अनुपलब्धता से संग्रहण की यह समस्या और भी विकराल हो जाती हैं। अतः इन उत्पादों की गुणवत्ता को बरकरार रखने एवं लंबे समय तक सुरक्षित व खाने योग्य रखने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पूसा शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष निर्माण विधि का विकास किया गया है जो स्थानीय संस्था एवं आसानी से उपलब्ध सामग्री से बनाया जा सकता है एवं ग्रामीण परिपेक्ष में एक वरदान साबित हो सकता है।

इन शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष के निर्माण में लगभग रु.1000 से कम लागत एवं पर्यावरण मित्र हैं। सामान्यता उर्जा शीतलक कक्ष का तापमान गर्मियों में बाहरी वातावरण से कम से कम 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक कम रहता है एवं शून्य उर्जा शीतला कक्ष में कच्ची सब्जियों की अवधि को 4 से 5 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।

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शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष के लाभ:-

  1. स्थानीय सस्ता एवं आसानी से उपलब्ध सामग्री से बनाया जा सकता है।
  2. कुशल व्यक्ति भी इसे संचालित कर सकता है।
  3. इसे संचालित करने के लिए किसी भी प्रकार की ऊर्जा शक्ति या बिजली की आवश्यकता नहीं होती है।
  4. पुराने कक्ष की सामग्री को अन्य कार्य में प्रयुक्त किया जा सकता है।

आवश्यक निर्माण सामग्री:-

  • ईटें, रेत, बांस, सीमेंट, ऊपरी ढक्कन बांस के फ्रेम में खसखस।
  • कक्ष में पानी के लिए बाल्टी, मग, बूंद बूंद पद्धति आदि।
  • संग्रहण के लिए प्लास्टिक की टोकरी।
  • यदि उपलब्ध हो तो तापमान मापने के लिए विभिन्न प्रकार के थर्मामीटर।
  • विसंक्रमण के लिए प्रयुक्त रसायनों के लिए हस्तचालित स्प्रेयर।

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कक्ष का निर्माण:-

  • कक्ष के निर्माण हेतु थोड़ी सी ऊपरी सतह जहां पानी की आपूर्ति पास में हो। कक्ष की सतह 65X45 इंच की ईंटों की सहायता से बनावे।
  • फर्श पर ईंटों की दोहरी दीवार 3 इंच जगह छोड़कर लगभग 27 इंच की ऊंचाई तक बनावे।
  • कक्ष को पानी से सरोबार कर दोनों दीवारों के बीच की 3 इंच जगह पर गीली रेत से भरे।
  • सूखी घास (खसखस) को बांस के फ्रेम से (65X45) इंच ढक्कन बनावे।
  • कक्ष को सीधे धूप. बारिश से बचाव हेतु एक घास/फूस/टिन/सीमेंट से छत बनावे।

सावधानियां:-

  1. शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष निर्माण हेतु सतह से उठी हुई जगह जहां पानी नहीं भरता हो तथा हवा बहती रहती हो। निर्माण में काम आने वाली सामग्री कार्बनिक पदार्थ रहित तथा ईंटों में रन्ध्रावकाश अच्छा होना चाहिए तथा टूटने वाली नहीं होनी चाहिए।
  2. ईंटें एवं बजरी पानी से संतृप्त रहना चाहिए तथा कक्ष पर धुप एवं बारिश से सीधा संपर्क नहीं होना चाहिए।
  3. संग्रहण के लिए प्लास्टिक या मिट्टी के पात्र काम में लेनी चाहिए अर्थात बांस की टोकरी फाइबर के बोर्ड/ बॉक्स एवं बोरिया काम में नहीं लेवे।
  4. जहां तक संभव हो सामग्री पानी के सीधे संपर्क में नहीं आवे।
  5. सामग्री को कक्ष में ढक कर रखें।
  6. शीतलक में आवश्यक तापमान एवं आदर्श हेतु समय-समय पर कक्ष में पानी देवे।
  7. कक्ष को समय समय पर फफूंद एवं कीटो से बचाव के लिए रसायनों से विसंक्रमित करते रहें।
  8. तीन साल में कक्ष को दोबारा बनावे।

इस प्रकार शून्य ऊर्जा शीतलक कक्ष प्रत्यक्ष लाभ के अतिरिक्त परोक्ष रूप से ग्लोबल वार्मिंग को कम करने। कुपोषण को कम करने, उद्यानिक उत्पादन का उचित मूल्य दिला कर, आयवर्धन द्वारा आजीविका का सुढृढ करता है।

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प्रस्तुति:-

लोकेश कुमार जैन विषय

विशेषज्ञ शस्य विज्ञान कृषि विज्ञान केंद्र दाता

बाड़मेर

राजस्थान

साभार:-

कृषि विश्व संचार

About the author

Bheru Lal Gaderi

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