फलों की खेती बागवानी

सीताफल की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

सीताफल की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक
Written by Vijay Dhangar

सीताफल अत्यंत पौष्टिक तथा स्वादिष्ट फल है। सीताफल के पौधों में सुख आसान करने की अधिक क्षमता होती है। राजस्थान में चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ जिलों में काफी मात्रा में पाया जाता है।

 

सीताफल की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

जलवायु एवं भूमि

इसके लिए गर्म एवं सुखी जलवायु की आवश्यकता होती है। पाले वाले क्षेत्र में इसकी फसल (custard apple cultivation) को हानि होती है। इसकी खेती के लिए 50 से 75 से.मी. वर्षा वाला क्षेत्र उपयुक्त होता है। इसकी खेती विभिन्न प्रकार की भूमि में की जा सकती है लेकिन अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए उत्तम मानी जाती है।

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सीताफल की उन्नत किस्में

स्थानीय किस्मों के अतिरिक्त निम्नलिखित उन्नत किस्में है।

बालानगर

इस किस्म के ह्रदय आकार के फल जो स्थानीय किस्मों की तुलना में बड़े व ज्यादा उपज देते हैं प्रति वृक्ष 8 से 10 किग्रा फल (औसत वजन 300 ग्राम) प्राप्त होता है। जिनमें प्रतिफल 18 से 25 बीज होते हैं।

अर्का सहन

संकर किस्म जिसके फल हल्के हरे रंग लिए बड़े आकार के होते हैं। प्रति वृक्ष 12 से 15 किग्रा. फल (औसत फल वजन 350 ग्राम) प्राप्त होते हैं तथा हस्त प्ररागण द्वारा उपज व फल गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। प्रति फल बीज 12 से 15 तक होते हैं।

पौधे लगाने की विधि

पौधे लगाने के लिए उपयुक्त समय जुलाई माह होता है। इसके पौधे 5x 5 मीटर की दूरी पर लगाए जाते हैं। पेड़ लगाने से पहले 60x 60x 60 सेमी आकार के गड्ढे खोद लिए जाते हैं। गड्ढों में रोपाई में पहले 10 किलो गोबर की खाद मिलाते हैं। फिर पौधों की रोपाई करते हैं।

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खाद एवं उर्वरक

अच्छी वृद्धि एवं उपज के लिए निम्न मात्रा में खाद एवं उर्वरक देवे।

पेड़ की आयु वर्ष मेंमात्रा किलोग्राम प्रति पौधा
गोबर की खाद (किलों)यूरिया (ग्राम)सुपर फास्फेट (ग्राम)म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (ग्राम)
1-3 वर्ष205020050
4-7 वर्ष2075300100
8 वर्ष से ऊपर20100400100

सिंचाई एवं अंतराशस्य

इसके छोटे पौधों को गर्मियों में 15 दिन के अंतर पर सिंचाई करनी चाहिए। नियमित सिंचाई देने पर अप्रैल मई माह में पुष्पन से जुलाई-अगस्त में फल आते हैं। प्रारंभ के तीन वर्षों तक बाग में कुष्माण्ड कुल की सब्जियों के अलावा सभी प्रकार की सब्जियां जैसे ग्वार, मिर्च, बैंगन, मटर, चवला आदि ली जा सकती है।

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सीताफल की कटाई छटाई

पुरानी सुखी एवं घनी शाखाओं की काट- छाट कर निकाल देना चाहिए। दिसम्बर-जनवरी माह में तथा बड़े वृक्षों को मई- जून में पानी रोकने से जुलाई में पुष्पन आता है जो अक्टूबर माह में फलन में आता है।

पौध संरक्षण

कीट प्रबंध

स्केल कीट

यह एक छोटे एवं चपटे आकार का कीट होता है तथा वृक्ष की कोमल टहनियों एवं फूलों पर एकत्रित होकर रस चूसता है। नियंत्रण हेतु पेड़ के आसपास की जगह को साफ रखें तथा अगस्त सितंबर तक थाले की मिट्टी को पलटते रहें। क्यूनालफॉस 1.5% चूर्ण अथवा मिथाइल पैराथियान 2% चूर्ण 50 से 100 ग्राम प्रति पेड़ के हिसाब से थालें में 10- 25 सेमी. की गहराई से मिलावें। पेड़ों पर इसके नियंत्रण हेतु मोनोक्रोटोफॉस 36 एस एल डाइमिथोएट 10 ई.सी. 1.5 मिलीमीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

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फूल एवं फल आने का समय

मार्च से जुलाई तक फूल आते हैं। फूल लगने के लगभग 4 माह बाद फल पक कर तैयार हो जाते हैं। फलों का पकना तब पता चलता है जब फलों की आंखें खुल जाती है तथा पीले रंग की हो जाती है। फल इसी अवस्था में तोड़ लेना चाहिए। इसको तोड़ने के तीन-चार दिन बाद फल पक जाते हैं।

सीताफल की तुड़ाई एवं उपज

सीताफल के पौधे 3 साल बाद फल देने लगते हैं। इस समय लगभग 5 किलो फल प्रति पौधा मिल जाता है। 5 साल बाद 12 से 15 किलो प्रति पौधा प्राप्त होता है।

प्रस्तुति:-

कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अधिकरण (आत्मा), चित्तौड़गढ़

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