कृषि योजनाएं

सूक्ष्म सिंचाई योजना एवं अनुदान राजस्थान में

Written by Bheru Lal Gaderi

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई योजना:-

राजस्थान में पानी का समुचित उपयोग हो इसके लिए सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को अपनाना  कृषकों एवं फसल उत्पादन के लिए लाभकारी है। बून्द-बून्द सिंचाई प्राप्ति के दृष्टिकोण से सूक्ष्म सिंचाई योजना (Micro irrigation scheme) आती उपयोगी एवं वैज्ञानिक तकनीक है। जल बचत, फसल उत्पादन लागत में कमी, उत्पादन एवं उत्पादन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी तथा फर्टिगेशन के द्वारा पोषक तत्वों के दक्ष उपयोग के मद्देनजर बून्द-बून्द सिंचाई प्रणाली समय की आवश्यकता है।

सूक्ष्म सिंचाई योजना

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पद्धति के उद्देश्य:-

  1. जल बचत और फसल पैदावार एवं गुणवत्ता में वृद्धि।
  2. उबड़-खाबड़ या ढालू भूमि पर भी सिंचाई के लिए अनुकूलता।
  3. उर्वरकों का दक्ष उपयोग।
  4. कम खरपतवार।
  5. फसल उत्पादन की लगत में कमी।

योजना के घटक:-

  1. ड्रिप सिंचाई यंत्र/मिनी स्प्रिंकलर फव्वारा सिंचाई सयंत्र/रेनगन
  2. योजना हेतु पात्रता
  3. कृषक के पास भू-स्वामित्व होना चाहिए।
  4. कृषक के सिंचाई की सुविधा हो।
  5. उद्यान विभाग में पंजीकृत निर्माताओं के S.I. मार्क सयंत्र क्रय किये हो।
  6. गत सात वर्ष के दौरान पांच हेक्टेयर की अधिकतम सीमा में सूक्ष्म सिंचाई सयंत्रों पर अनुदान न लिया हो।

अनुदान प्रक्रिया:-

  • कृषक द्वारा निर्धारित आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन ई मित्र सेंटर पर एवं हार्डकॉपी सम्बंधित क्षेत्र में कृषि/उद्यान विभाग के कार्यालय में भेजा जाये।
  • विभाग द्वारा सयंत्र का भौत्तिक सत्यापन किया जायेगा।
  • पात्र लाभार्थी/आपूर्तिकर्ता के पक्ष में अनुदान स्वीकृत एवं ऑनलाइन अनुदान जारी किया जा है।

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अनुदान की सीमा:-

पात्र कृषक को ड्रिप सिंचाई सयंत्र /मिनी स्प्रिंकलर फव्वारा सिंचाई सयंत्र/रेनगन पर अधिकतम 5 हेक्टेयर तक अनुदान देय होगा। अनुदान की गणना भारत सरकार द्वारा निर्धारित इकाई लागत के आधार पर की जाएगी।

सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत देय अनुदान का विवरण निम्नानुसार  है –

क्र. सं. फव्वारा सयंत्र मिनी/ माइक्रो स्प्रिंकलर/ ड्रिप सिंचाई सयंत्र
श्रेणी अनुदान श्रेणी अनुदान
1. सामान्य 50 प्रतिशत सामान्य 50 प्रतिशत
2. लघु सीमान्त 60 प्रतिशत लघु सीमान्त 70 प्रतिशत

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Bheru Lal Gaderi

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