कीट नियंत्रण

गुलाबी इल्ली का कपास में प्रकोप एवं बचाव

गुलाबी इल्ली
Written by Vijay Gaderi

कपास की फसल परविभिन्न अवस्थाओं मेंलेपिडोप्टेरा गण के अनेक कीटों द्वारा हानि पहुंचाई जाती है। इन कीटों में गुलाबी इल्ली (pink caterpillar) या गुलाबी डेंडू छेदक, पेक्टिनोफेरागोसिपीला (सान्डर्स) महत्वपूर्ण है। इनसे फसल के बचाव निम्न हैं:-

गुलाबी इल्ली

गुलाबी इल्ली का वयस्क भूरे, गहरे भूरे रंग का लगभग 10 मिमी. लंबा होता है व उसके पंखों का फैलाव 15 मि.मि. होता है। अगले जोड़ी पंखों पर एक काला धब्बा पाया जाता है और पिछले जोड़ी पंखों के किनारे झालरनुमा होते हैं। इल्ली आरंभ में मट मैले पीले रंग की होती है, जो बाद में गुलाबी रंग की हो जाती है।

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इल्ली द्वारा हानि:-

  • गुलाबी ईल्ली के व्यस्क उड़ने वाले अत्यंत सक्रिय किट होते हैं, जबकि गुलाबी इल्ली (लार्वा) मुख्यतः आंतरिक बेधक हैं, जो घेटों में रहकर बीजों पर अपना पोषण प्राप्त करती है। इल्ली घेटों के अतिरिक्त फूलों एवं फुल पुड़ियों में भी पाई जाती है व उन्हें हानि पहुंचाती हैं।
  • इल्ली फूलों की पंखुड़ियों को एक विशिष्ट तरीके से बुनती हैं, जो अपने विशेषल क्षणों के कारण दूर से ही पहचाने जाते हैं। इल्लियों के घेटों के रहने के कारण वेविकृत हो जाते हैं, सड़ जाते हैं। अपरिपक्व अथवा अपूर्ण रेशों की लम्बाई कम हो जाती है और उन में रंजक के कारण गुणात्मक हास्य भी होता है।
  • कपास की फसल में गुलाबी इल्ली की उत्पत्ति के अनेक कारण पाए गए हैं जिनमें प्रमुख हैं:-
  • फसल के अवशेषों का लंबे समय तक खेतों में पड़े रहना। प्रायः वे अवशेष अगली फसल तक खेतों में ही पड़े रहते हैं।
  • कीट की सीमित प्रजाति के पौधों पर पोषण प्राप्त करने की क्षमता।
  • लंबी अवधि वाली बीटी कॉटन कपास की संकर प्रजातियों का लगाना, जिससे किट को लगातार पोषण मिलता रहता है।
  • बीटी कपास की अत्यधिक प्रजातियों की उपलब्धता, जिनमें विविध समय पर पुष्पन व फलन होता है। इस कारण कीट को लगातार पोषण मिलता रहता है।
  • सामान्यतः गुलाबी डेंडु छेदक की इल्ली (लारवा) नवंबर- दिसंबर माह में फसल को हानि पहुंचाती है। इसके बाद फरवरी में कपास फसल की अनुपस्थिति में यह फसल के रूप में सुषुप्ता अवस्था में जाती है। फसल की उपलब्धता फरवरी के पश्चात्भी बनी रहने पर कीट फसल वाले पौधों पर सक्रिय बना रहता है।
  • अनेक स्थानों पर कपास की फसल को वर्ष-भर खेतों में बनाए रखा जाता है, जिससे संपूर्ण की टका जीवन चक्र बना रहता है।
  • बीटी कपास के आसपास नोन बीटी कपास की पांच कतारें अथवा कुलक्षेत्र का 20% लगाना अनिवार्य होता है। इसका पालन अक्सर कृषको द्वारा नहीं किया जाता है।इस कारण किट में प्रतिरोधकता विकसित हो रही है।
  • अपरिपक्व कपास का लंबे समय तक जिनिंग मिल में भंडारण भी अगली फसल में गुलाबी डेंडु छेदक के प्रकोप का कारण बन रहा है।
  • बीटी संकर प्रजातियों की पहली पीढ़ी में बीजों का प्रगण कभी पौधों पर खेतों में गुलाबी इल्ली के लिए प्रतिरोधकता विकास को बढ़ा रहा है।

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कैसे करें कीट प्रबंधन?:-

  • कीट प्रकोप की स्थिति पर लगातार निगरानी रखें और प्रकोप के आरंभ से ही समेकित कीट प्रबंधन के निम्न उपाय करें:-
  • कपास को लंबे समय तक रखना अथवा कपास की पेडी की फसल लेना तुरंत बंद करें।
  • कपास फसल के बचे हुए अवशेषों को शीघ्र ही खेतों से समाप्त करें।
  • फसल को समयपर समाप्त कर अगली फसल ले अथवा खेत की गहरी जुताई करें।खेत को खाली रखें।
  • कपास की शीघ्र पकने वाली जातियों को लगाएं, जिससे फसल में घेटे की टका अत्यधिक प्रकोप होने से पूर्व ही परिपक्व हो जाए।
  • बीटी कपास के चारों ओर नॉन बीटी (रिफ्यूजिया) कपास निर्धारित मात्रा में आवश्यक तौर पर लगाए।
  • बीज को अप्रैल-मई की तेज गर्मी में 2 से 3 दिनों के लिए सुखाएं या उसे बुवाई पूर्व 60डिग्री सेल्सियस तापक्रम पर 15 मिनट के लिए रखें।
  • बीज को बुवाई पूर्व वायु अवरोधक पात्रों अथवा भंडार ग्रहों में मिथाइलब्रोमाइड 2 लीटर/घन मीटर से प्रदूषित किया जा सकता है।
  • कीट प्रकोप पर सतत निगरानी रखने के लिए फसल की पुष्पन अवस्था से खेतों में फीरोमोन प्रपंच (10 प्रपंच प्रति हेक्टेयर) स्थापित करें वह प्रत्येक सप्ताह बिना किसी भेदभाव के एक निश्चित संख्या में हर घेटों को तोड़कर उनमें किट की उपस्थिति देखें।फीरोमोन प्रपंच सेप्टा/ल्योर को प्रत्येक 21 दिन में बदले।यह प्रपंच फसल की परिपक्वता तक लगा रहने दें जिससे किनर पंखियों को एकत्रित कर नष्ट किया जाना संभव होगा।
  • चकरीनुमा फूल, गिरे हुए घेटे सूखे फूल/फूल पूड़ी एवं घेटों को अविलंब नष्ट करें।
  • अंतिम चुनाई के बाद पालतू पशुओं व भेड़- बकरियों को खेत में शेष रहे अपरिपक्व घेटों व कीट प्रको पित घेटों को खाने के लिए छोड़ें। इससे अगले वर्ष कीट प्रकोप रोकने में मदद मिलेगी।

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