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गौ कृपा अमृतम द्वारा 5 सरल चरणों में खेती

गौ कृपा अमृतम
Written by Vijay Gaderi

वेदों में स्पष्ट रूप से कहा गया है की जैसी गोमाता की स्थिति वैसी हमारी स्थिति हमारे गुरुदेव भी स्पष्ट रूप से कहते थे की जब तक गाय और किसान दुखी है तब तक देश कभी खुश नहीं रह सकता। बहुत विचार, अनुसंधान और परीक्षण के बाद, गुरु, गोविंद और गौमाता के आशीर्वाद से, हमने एक बहुत ही सरल और सस्ती पद्धति विकसित की है। हमारा विश्वास है कि यह पद्धति किसी भी किसान को आत्म-सम्मान के साथ सफलतापूर्वक खेती करने में सक्षम बनाएगी। इस विधि को गोमाता के प्रसाद रूपी गौ कृपा अमृतम बेकटेरियल कल्चर की मदद से सम्भव बनाया गया है, इसलिए हमने इसे गौ कृपा कृषि पद्धति का नाम दिया है।

गौ कृपा अमृतम

गो- कृपा अमृतम- जीवाण्विक संस्कृति क्या है?

गौ- कृपा अमृतम प्राकृतिक गाय आधारित पदार्थों और अन्य जड़ी बूटियों के उपयोग से निर्मित मित्र जीवी किटाणुओं का मिश्रण (कल्चर) है, जो हमारे विस्तृत अनुसंधान और परीक्षण का परिणाम है।

गो कृपा अमृतम के लाभ इस प्रकार हैं-

  1.  धरती में मिल सूक्ष्म कीटाणुओं का संचार करता है वनस्पति की रोग प्रतिकारक शक्ति और गुणवत्ता बढ़ाता है।
  2. वनस्पति को सुपाच्य स्वरूप में पोषक तत्त्व उपलब्ध कराता है और केचुओं की वृद्धि करता है।
  3.  परती ज्यादा नरम बनती है बारिश का पानी ज्यादा अच्छी तरह से सोख लेती है और समय के साथ खेती में पानी की आवश्यकता कम होती है। चरती में भूजल का प्रमाण बढ़ता है।
  4. किसान कम से कम खर्च कर के स्वाभिमान से गौ आधारित खेती कर सकता है। यह सभी प्रकार की फसलों में बहुत उपयोगी है।

गौ कृपा अमृतम भारत के किसानों को निःशुल्क दिया जा रहा है। अगर इस उत्पाद के लिए कोई धन राशि लेता है तो हम कानूनी कार्यवाही करेंगे। हम किसानों को विनती करते हैं की गो कृपा अमृतम का उपयोग अपनी जमीन के एक भाग में करें। उसके परिणाम देखने के बाद अपनी बाकि की जमीन पर इसका प्रयोग करें। इस उत्पाद के उचित प्रयोग से कोई हानि नहीं है।

गो कृपा अमृतम दिव्य गोमाता की कृपा है। हमारी नम्र विनती है की हम इस वस्तु का प्रयोग गोमाता को वंदन करके करे और समृद्ध बनें।

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गो कृपा अमृतम से बने द्रावण की विशेषताएं-

  • हरित क्रांति के पहले 1970 मे १ ग्राम मिट्टी में 2 करोड़ से अधिक उपयोगी सूक्ष्म जीवाणु पाये जाते थे पर अब इसके 20% से भी कम बचे है। चाहे मानव शरीर हो या धरती, यह मिल सूक्ष्म कीटाणु स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • गौ कृपा अमृतम में 70 से अधिक अलग अलग प्रकार के मिल बैक्टीरिया (मिल सूक्ष्म कीटाणु) है जो धरती में प्रवेश करने के बाद अनुकूल वातावरण में अपने आप बढ़ते रहते हैं।
  • इसमें अधिकतर 24 प्रकार के बैक्टीरिया ऐसे है जो हवा में से नाईट्रोजन लेकर सुपाच्य स्वरूप में जड़ों को उपलब्ध करते है। इस लिए किसानों का यूरिया का खर्च बच जाता है। कुछ बैक्टीरिया ऐसे है जो रोग नियंत्रक और किट नियंत्रक का काम करते हैं।
  • ऐसे बैक्टीरिया जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में जिओ बैक्टीरिया कहते है। यह बैक्टीरिया गोमय, गोमूल और धरती मे रहे धातु और खनिज पदार्थों को सुपाच्य स्वरूप में जड़ों को उपलब्ध करते हैं।
विशेष सूचना:-

गो कृपा अमृतम में रहे मिल सूक्ष्म कीटाणुओं को देसी गाय का ही छाछ, गोबर और गोमूल पसंद है, इसी लिए आपको देसी गाय के पंचगव्यों के साथ उत्त परिणाम मिलेंगे। इस लिए भैया विदेशी गाय के गोबर का उपयोग नहीं करना है। इस लिए हमारी बिनती है की अगर आप के पास देसी गाय नहीं है तो किसी गौशाला से देसी गाय का खाद खरीद कर उपयोग कीजिये। और अगर आप देसी गाय खाते है तो उसे ज्यादा सरलता से संभाल सकेंगे।

आप की यूरिया और DAP सब्सिडी से आप गाय के लिए दाना (कंसन्ट्रेट फीड) खरीद सकते हैं। आप बीडीसाइट का उपयोग न करके पाक के बीच जंग रहे जंगली घास अपनी गाय को खिला सकते हैं। और गौ कृपा अमृतम बैक्टीरिया का उपयोग करके गाय के गोबर और गोमू से आप उत्तम गुणका खाद और कीटनाशक द्रव्य का निर्माण ही कर सकते हैं।

किसान भाइयों से बिनती है की वह गो कृपा अमृतम का उपयोग अपनी जमीन के एक हिस्से में करे, और उसके परिणाम के अनुसार बाकि की जमीन में उपयोग करना शुरू करे। उदारहरण स्वरूप, अगर आप के पास 20 एकड़ जमीन है तो पहले आप आधे एकर जमीन में उपयोग करें। अगर आप को सफल परिणाम प्राप्त हो तो बड़े पैमाने पर गाय रख कर स्वाभिमान के साथ स्वनिर्भर हो कर खेती करें।

खेत में डांगर, गेहूँ और अन्य फसल लेने के बाद फसल के बाकि का हिस्सा जलाया जाता है। ऐसा न करके रोटरी के माध्यम से खेत में मिला कर उस पर गो-कृपा अमृतम छिड़क देंगे तो वह बैक्टीरिया का खुराक बनकर अच्छी साद बनेगा, किसान को अच्छा लाभ होगा और प्रदूषण भी नहीं होगा।

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गो कृपा अमृतम 5 चरणों में उपयोग की सरल विधि

पहला चरण (1st step) गो-कृपा अमृतम की वृद्धि कैसे करेंगे? –

  • पहले चरण में आपको 200 लिटर पानी का ड्रम लेना है। अच्छे से साफ करके इस में 200 लिटर पानी भर देना है। इम एकदम साफ होना चाहिए। अंदर कोई तेल या केमिकल कुछ लगा नहीं होना चाहिए। एक बाल्टी में थोड़ा पानी लेकर उसमे 2 किलो गुड़ मिलाकर गुड़ का पानी बनाकर वह 200 लिटर में डाल देना है।
  • 2 लिटर देसी गोमाता से प्राप्त हुई ताजी छालें। इसे इस में डाल दें। इसमें 2 लिटर गौ कृपा अमृतम डाल दें।
  • ड्रम आपको किसी पेड़ की छांव के नीचे रख देना है। उसे सूती कपड़े से ढक देना है ताकि अंदर कोई जीव या कचरा पड़े। अगर कोई पेड़ नहीं है तो ग्रीन नेट के नीचे रख सकते हैं। वर्षा ऋतु में इसे बारिश के पानी से बचा कर रखना है।
  • साफ-सुथरे लकडे से रोज 5 मिनट घड़ी की दिशा में हिलाएँ। 5 से 7 दिन में आपका गौ कृपा अमृतम तैयार हो आएगा। अगर आपको हर रोज इसे हिलाने में दिक्कत हो रही है तो मछली घर में हवा छोड़ने वाला 200 से 200 रुपये का एक छोटा सा मशीन आता है। इसे ड्रम पर लगा देंगे तो एक हफ्ते से कम समय में भी गौ कृपा अमृतम कल्चर तैयार हो सकता है।
  • जैसे दहि के जामन से आप और अधिक दहि बना सकते है वैसे ही इस जामन के उपयोग से आप और गो-कृपा अमृतम बना सकते हैं। इस हम में से गौ कृपा अमृतम उपयोग करते करते सिर्फ 10 लिटर जब बचता है तो वापस अंदर 200 लिटर पानी, 2 किलो देसी गुड का पानी और 2 लिटर देसी गोमाता से प्राप्त हुई ताजी छाछ दें। एक हफ्ते में वह पुन 200 लिटर बन जाएगा।
  • इस द्रावण का दिन के बाद उपयोग कर सकते हैं, 1 महीने के बाद कर सकते है 2 महीने, 6 महीने हमने तो 2 साल पुराना भी उपयोग करके देखा है, इसकी प्रभावशीलता कम नहीं होती है। लेकिन एक महीना अगर कोई पेड़ के नीचे पढ़ा रहा है तो आपको हर महीने उसमे 1 किलो गुड और 2 लिटर देसी गोमाता की ताजी छाछ डालना अति आवश्यक है ताकि उसे खुराक मिलता रहे।
  • गौ- कृपा अमृतम साल में 4 बार रंग बदलता है। कभी पुराना हो गया तो हरा रंग हो सकता है, फिर थोड़ा काला रंग भी पड़ सकता है, लेकिन गुण नहीं बदलता है तो रंग बदलना चिंता का विषय नहीं है। कभी अंदर छोटे मोटे जीव भी पढ़ सकत है तो उसको छान के खेत में उपयोग कर सकते हैं।
  • उसकी खुशबू थोड़ी अलग अलग हो सकती है लेकिन गुण बदलता नहीं है। कभी कभी उस में बुलबुले भी आ सकते हैं। ऊपर हल्की सी जारी भी हो सकती है। अगर जारी न भी हो तो भी चिंता का विषय नहीं है, क्यूँकी उसका गुण बदलता नहीं है
विशेष सावधानी:-

आपको हम से या किसी अन्य किसान या संस्था से अब गो- कृपा अमृतम प्राप्त होता है तो ध्यान रखें की बॉटल के ढक्कन में छेद हो। बेकटेरिया को जीवित रहने के लिए हवा मिलना अति आवश्यक है। इसी तरह जब आप अन्य किसान को गौ- कृपा अमृतम देते हैं तो बॉटल में छेद करके ही दें।

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दूसरा चरण (Step 2) – गो कृपा अमृत से देसी गाय का गोबर कंपोस्ट करने की विधि

  • 1000 किलो गोबर की 2 फीट ऊंची और 2.5 फीट चौड़ी लंबी लाइन कर दीजिए।
  • जब हम गोबर की बात करते हैं तो देसी गोमाता का गोबर ही लेना है, क्योंकि सिर्फ देश गौमाता के गोबर में ही 1200 से अधिक कंपाउंड (compound) होते हैं और 5200 से अधिक कंपाउंड होते हैं। इतने अधिक पोषक तत्व विदेशी गाय, बकरी या भैंस के गोबर में या सूखे पत्तों में उपस्थित नहीं होते।
  • इसे लाइन के ऊपर बेबू से अलग-अलग जगह पर ज्यादा से ज्यादा छेद बना दीजिए और ऊपर 30-35 लीटर गो- कृपा अमृतम छिड़क दीजिए और हर रोज या सर दो- तीन दिन जसको गीला करते रहिए। या आप इसके ऊपर ड्रिप भी लगा सकते हैं। हर 15 दिन के अंतराल में गोबर को पलटा कर वापिस छेद करके गौ कृपा अमृतम् दालें । और यह किसी पेड़ की छांव में आपको लाइन लगानी है या फिर ग्रीन नेट लगाकर के नीचे रख सकते हैं। सिर्फ 30 दिन में उत्तम गुणवत्ता वाला खाद बन जाएगा। अगर उससे जल्दी भी आपको चाहिये तो उसको खाप लगा कर के थोड़ा गी कृपा अमृत वापस अंदर डालते जाइए और उलट-पलट करते रहिए।
  • देसी गाय के गोबर के साथ खेत के सूखे धास या पत्ते भी कॉपोस्ट करने के लिए इसका उपयोग हो सकता है। यह खाद ठंडी प्रक्रिया (cold-process) से बनेगा जिसके परिणामस्वरूप बहुत ही सरलता से सुपाच्य स्वरूप में माइक्रोन्यूटरिशन बने रहेंगे। कई बार किसानों के पास कॉपोस्ट खाद तैयार नहीं होता, तो ऐसे समय गोबर गैस की स्लरी गौ- कृपा अमृतम के साथ मिला कर पानी के साथ खेत में बहा सकते हैं। इससे भी अच्छा लाभ होता है।
  • हम एक एकड़ जमीन के लिए एक गौमाता रखने की सलाह देते हैं। एक गौमाता वर्ष में कम से कम 4 टन गोबर देती है और 8000 लिटर गोमूख देती है। अगर कहीं छोटी नस्ल की गाय है तो 2 गाय का गोबर लेना है और यह खाद तैयार होने के बाद छांव में ही रखना है।
विशेष ध्यान-

यह गौ कृपा अमृत्तम द्वारा कम्पोस्ट हुआ खाद आपको खेत के चास में डालना है। चास में डालेंगे वो आजू बाजू की खरपतवार को खाद्य नहीं मिलेगा वह धीरे- धीरे कट्रोल होंगे और जिसको चाहिए उसी को खाद मिलेगा। बारिश के पहले या बुवाई के पहले जब भी आप डालते है तो 10 से 15 दिन पहले ही डाल कर रख सकते है। थोड़ी मिट्टी भी उसके पर लगा सकते हैं, धूप में खुला छोड़ने से उसकी गुणवत्ता कम होने लगती है, काफी कंपाउंड चले जा सकते है। इसीलिए नम्र विनती है कि पूरी प्रक्रिया का सही तरीके से अनुकरण करें।

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चरण तीसरा (Step 3):- खेत में कैसे और कितना डालना है ?

प्रति एकड़ पहली बार 2000 लिटर गौ कृपा अमृतम पानी के साथ बहा देना है चाहे कोई भी कॉप आपने लगाया हो। इसके द्वारा 20 से 30 साल से भी पुरानी यूरिया की जो परत जमी हुई होगी बैक्टीरिया उसे तोड़ कर पूरी भूमि को नरम बनाना चालू कर देंगे। उसके बाद हर महीने कुल मिला कर 1500- 2000 लीटर प्रति एक गो-कृपा अमृतम को खेत में जाना चाहिए।

अगर आप ड्रिप से देते हैं तो भी गौ कृपा अमृतम् देना काफी सरल है। इसे छानने की आवश्यकता नहीं है। सीधा वेंचुरी लगा देंगे तो ड्रिप में बहुत सहजता से बैक्टीरिया बह जाएगा। बैक्टीरिया की वजह से ड्रिप में क्षार जमने की समस्या भी कम हो आएगी। उसी तरह गो कृपा अमृतम् स्प्रिंकलर और फ़्लड इरीगेशन से भी बहुत आसानी से दे सकते हैं।

इसको ड्रिप में भी वेंचुरी लगा कर के आप दे सकते हैं, स्प्रिंकलर के फव्वारे में भी बहुत सरलता से इसका उपयोग वेंचुरी के द्वारा हो सकता है। फ्लड इरीगेशन मतलब क्यारियों में पानी सीधा बहाते है तो उसमें भी आप चकली चालू करके सीधा ड्रम में पानी के साथ बहा सकते हैं ।

चरण चौथा (Step 4) किट नियंत्रक के रूप में इसका कैसे उपयोग करें?

2 लीटर गो- कृपा अमृतम् 2-3 लिटर देशी गोमाता की ताजा और बाकी का पानी लेकर 15 लिटर का पम्प तैयार करें। लगभग एक एकड़ में 20-25 पम्प आपकी आवश्यकता अनुसार हर हफ्ते डाल देना है। अगर आपका कोई फसल जटिल है जैसे भिंडी, मिर्ची आदि तो उसमें हर दो-तीन दिन में केमिकल का उपयोग होता है। उसकी जगह हर दो-तीन दिन पर गो कृपा अमृतम् का स्प्रे कर देना है।

जैसा कि हमने आयुर्वेद से सीखा है कि हो सके तो ऐसी परिस्थिति का निर्माण हो की रोग आए ही नहीं। गौ कृपा अमृत का स्प्रे या छिड़काव इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इसमें 8 से अधिक ऐसे बैक्टीरिया है जो अपने शरीर से ऐसे एंजाइम या रस छोड़ते है जिसकी वजह से बेकाम के कीट और कीटाणु वनस्पति से दूर भागते हैं।

इसलिए ऊपर दी गई पद्धति से गो कृपा अमृतम् का नियमित छिड़काव करना आवश्यक और लाभदायक हैं।

इसे पौधे के जीवन काल के कौन से चरण (स्टेज) पर डालना है? जैसे अभी बुवाई हुई है उससे पहले इसको बीज कै पड देने में भी उपयोग कर सकते है, बीज संस्कार में भी उपयोग कर सकते है, बुवाई के समय 15 दिन की फसल, फ्लावरिंग स्टेज, फल का स्टेज, कटिंग का स्टेज में भी किसान मित्र डाल सकते हैं। इसके कोई साइड इफेक्ट या अनचाहा असर नहीं है।

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चरण पांचवा (Step 5): आपातकालीन किट नियंत्रण

कभी-कभी कोई फसल में बहुत जटिल रोग आ जाते हैं जो सिर्फ 2 लीटर गो- कृपा अमृतम् से नहीं जा रहे हैं तो एक आपको आपात कालीन (इमरजेंसी) में उपयोग करने की विधि हम बताते हैं-

  • आपके खेत में कहीं मटके में या ड्रम के अंदर देशी गोमाता से प्राप्त हुई छाछ भर के रख दीजिए। इसके अंदर तांबे के टुकड़े डाल दीजिये। उसको पुरानी होने दीजिए।
  • 40 दिन के बाद पुरानी खा तैयार हो जाएगी और इस छाछ में तांबे के गुण आ जाएंगे।।
  • 15 लीटर के पम्प में 200ml से लेकर 2 लीटर जितनी तांबे वाली 40 दिन से अधिक पुरानी छ लेनी है, 2 लीटर गो-कृपा अमृतम् लेना है और 200ml से लेकर 2 लीटर ताजा गोल लेना है। गोमूत्र पुराना नहीं लेना है, ताजा गोमूत्र ही लेना है। और बाकी का 9 से5 लीटर पानी मिला के प्रयोग करें। सामान्यतः पुरानी छाछ और ताजा गोमूत्र छोटे पौधों के लिए आप कम मात्रा का प्रयोग करे और बड़े पौधों और वृक्षों के लिए अधिक मात्रा में लें। पुरानी छाछ और ताजा गोमूत्र का प्रमाण धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं। और 2-2 लीटर का प्रयोग करें।
  • सबसे पहले 10-20 पौधों पर प्रयोग करें आपको सटीक परिणाम दिखाई देगा और फिर इसे पूरे खेत में उपयोग किया जा सकता है। अगर इससे आपको संतोषकारक परिणाम नहीं मिलता है तो आप गो कृपा अमृतम् 45 दिन पुरानी तांबे वाली और ताजे गोमूत्र के साथ लहसुन और मिर्ची भी जोड़ सकते हैं। जैसे ही कीट या बीमारी नियंत्रण में आ जाति है, तुरंत इस प्रयोग को रोक दें और चौथे नियम के अनुसार स्प्रे करें।
  • कभी कभार आपके फसल में बहुत फंगस लगी है या पत्ते के ऊपर वायरस लगा हुआ है तो यह छिड़कने से शायद कुछ पत्ते मुरझा जाए तो वापस उसमें से नए पत्ते आएंगे तो यह चिंता का विषय नहीं है।
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