कृषि यंत्र/ Agriculture Machinery

थ्रेशर का चुनाव तथा कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां

Written by Vijay Gaderi

थ्रेसर यंत्र खरीदते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर ही थ्रेशर का चुनाव करना चाहिए:-

थ्रेशर का चुनाव

गुणवत्ता चिन्ह:-

भारतीय मानक संस्थान यंत्र को बनाने के लिए कुछ निर्देश देता है और उनके अनुसार अगर थ्रेशर बनाया गया हो तो, उन थ्रेशरों को भारतीय मानक संस्थान मान्यता देता है। जहां तक हो सके आईएसआई चिन्ह वाली मशीन ही खरीदना चाहिए।

मशीन की क्षमता:-

गहाई मशीन आजकल अलग-अलग क्षमता की बनाई जाने लगी है। इसका सीधा संबंध शक्ति के स्त्रोत से है। बाजारों में भिन्न-भिन्न क्षमता तथा शक्ति की आवश्यकता वाली मशीनें उपलब्ध है, इसलिए क्षमता और उपलब्ध शक्ति के अनुसार थ्रेशरों का चुनाव करना चाहिए। साधारणतया गेहूं, चना, सोयाबीन थ्रेसर की क्षमता 0.4 से 0.5 क्विंटल/अ.श./घंटा और ज्वार तथा धान थ्रेशर की क्षमता 0.75 से 1.0 क्विंटल/अ.श./घंटा होती है।

कीमत:-

थ्रेशर (Thresher ka chunav) का चुनाव उसकी कीमत पर निर्भर करता है, क्योंकि हमेशा किसान कम कीमत वाला थ्रेसर लेना चाहता है। लेकिन यह कभी-कभी गलत भी साबित हो सकता है। कम कीमत के थ्रेशरों में पुर्जें हल्के दर्जे के लगे होते हैं। जिससे थ्रेशर ज्यादा दिन तक काम नहीं देता।

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मरम्मत और स्पेयर पुर्जों की उपलब्धता:-

गहाई एक समय बद्ध तथा अल्पकालीन काम है। इसलिए किसानों को वही थ्रेशर लेना चाहिए जिसके पुर्जें स्थानीय बाजार में उपलब्ध हो। अगर यंत्र की मरम्मत स्थानीय कारीगरों से नहीं होती तो किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

सुरक्षा उपकरण:-

थ्रेशरों के प्रयोग के साथ- साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ रही है। क्योंकि थ्रेशरों का काम करने वाले श्रमिक प्रशिक्षित नहीं होते और उनको पूरी जानकारी ना होने से दुर्घटना हो जाती है। इसलिए जिन थ्रेशरों पर सुरक्षा उपकरण हो उसका ही चुनाव करना चाहिए। इसके अभाव में धन एवं जन दोनों की क्षति होने की संभावना है।

डिजाइन:-

अच्छी डिजाइन अर्थात आई.एस.आई. के निर्देशों के अनुसार बनाई गई चलने में हल्की, पुर्जों की कसावट तथा कंपन रहीत तथा उसमें पुर्जों को बदलने की सुविधा आदि गुण होते हैं। उच्च कोटि के पुर्जे ज्यादा देर तक चलते हैं और दोष रहित काम करते हैं।

समायोजन की सुविधा:-

थ्रेशरों में विभिन्न इकाइयां काम करती है। उनका यदि सही तालमेल नहीं रहा हो तो गहाई ठीक नहीं होती। कभी- कभी गहाई करते समय दाने टूटते हैं या भूसे के साथ चले जाते हैं। इन सारी इकाइयों के सही तालमेल के लिए हर इकाई में समायोजन की ठीक सुविधा होनी चाहिए। जिन थ्रेशरों में यह प्रावधान हो वह कम नुकसान देता है। जैसे की हवा की गति, कनवेंस क्लीयरेंस, छलनियों की चाल इत्यादि का समायोजन करने से गहाई अच्छी होती है। इसलिए अच्छे नतीजे के लिए जिस क्षेत्र में यह समायोजन की सुविधा हो उसी का चुनाव करना चाहिए।

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शक्ति स्त्रोत:-

गहाई मशीन चलाने के लिए शक्ति स्त्रोत की आवश्यकता होती है। साधारणतया वही किसान थ्रेशर खरीदते हैं जिनके पास पहले से ही कोई न कोई शक्ति स्रोत उपलब्ध होता है। किसान के पास उपलब्ध स्त्रोत से मेल खाने वाला थ्रेशर ही खरीदना चाहिए उससे कम या ज्यादा शक्ति का थ्रेशर खरीदने से काम ठीक नहीं होगा या थ्रेशर को चलाना स्त्रोत की क्षमता के बाहर होगा। ज्यादा क्षमता का स्त्रोत हो तो उसकी शक्ति बिना सही उपयोग किए व्यर्थ जाएगी इसलिए ठीक शक्ति का थ्रेशर ही खरीदना चाहिए।

उगाई जाने वाली फसलें:-

हर फसल की गहाई एक ही यंत्र से नहीं की जा सकती। जैसे दलहनी फसलों की गहाई गेहू के थ्रेशर से नहीं होती। इसलिए फसल के अनुसार थ्रेशर का चुनाव करना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा ली जाने वाली फसलों के अनुरूप थ्रेशर खरीदना अच्छा रहता है। अगर थ्रेशर को अपना काम होने के बाद किराए पर देना हो तो उसके की प्रमुख फसल का भी ध्यान रखना चाहिए।

विभिन्न फसलों की बुवाई की सुविधा एवं परिवर्तन में सरलता:-

भारत में किसान एक से ज्यादा किस्म की पैदावार लेते हैं। एक ही किसान दलहन, तिलहन या खाने की अनाज कि किस्में लेता है। उनकी सुविधा होगी कि सभी फसलें एक थ्रेशर से गहाई की जाए।  जिससे थ्रेशर में परिवर्तन करने की सुविधा हो, उस थ्रेसर का चुनाव करना चाहिए।

गहाई में श्रमिकों की आवश्यकता:-

कटाई और गहाई एक अल्पकालिन कार्य है। इस में श्रमिकों की काफी कमी रहती है। क्योंकि सभी लोग कटाई तथा गहाई का काम एक ही समय पर करते हैं। इस स्थिति में जिन थ्रेशरों में कम श्रमिकों की आवश्यकता होती है उसका चुनाव फायदेमंद होता है।

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गहाई यंत्र की स्थापना:-

कढ़ाई मशीन का सही उपयोग तथा उसकी कार्य क्षमता इस बात पर बहुत हद तक निर्भर करती है कि उसकी स्थापना किस स्थान पर और किस ढंग से की गई है। मशीन के पुर्जो का निरीक्षण भली-भांति कर लेना चाहिए जैसे कि नटबोल्ट, ग्रीस का कप, पुल्लिया आदि ठीक से जोड़ना चाहिए। इन सब कार्यों को मशीन का पूर्व निरीक्षण कहते हैं। मशीन की कार्य क्षमता तथा बाधा रहित कार्य इन्हीं बातों पर निर्भर करता है।

गहाई मशीन स्थापित करने से पूर्व निम्नलिखित बातों पर ध्यान रखना चाहिए।:-

थ्रेशर में भूसा निकलने की दिशा हवा बहने की दिशा में होनी चाहिए। अगर यह विपरीत होगी तो श्रमिकों के ऊपर निकासी से भूसा वापस आएगा और उनको काम करना कठिन होगा। दूसरी तरफ भूसा दानें में मिल जाएगा। दानें को फिर से साफ करना पड़ेगा। इसलिए दोनों की दिशा एक होनी चाहिए।

 मशीन की स्थिरता:-

गहाई मशीन व शक्ति स्त्रोत का अपने अपने जगह स्थिर होना बहुत ही जरूरी है। इसको स्थिर रखने के लिए थ्रेशर को जमीन में लगभग १५ से.मी. गड्डे करके उसमें रखे जाते हैं। थ्रेशर पक्के फर्श पर होने पर पहियों को ितों से स्थिर किया जाता हैं और खूटियों के सहारे रस्सी से बांध दिया जाता है. ट्रैक्टर के पहियों को भी ऐसे ही स्थिर रखा जाता है।

गहाई मशीन का समतलीकरण:-

थ्रेशर को लंबाई तथा आधे रूप से समतल करना चाहिए ताकि सभी इकाइयों पर समान रूप से वजन पड़े तथा गहाई यंत्र ठीक से बेहतरीन तालमेल से काम कर सके।

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थ्रेसर की पुली तथा शक्ति स्त्रोत की पुलि की सिधाई:-

थ्रेसर की पुलि तथा ट्रेक्टर या कोई भी शक्ति का स्त्रोत हो तो उसकी पुलि एक ही सीध में होना चाहिए। नहीं तो पट्टा बारबार पुलियों से उतर जाएगा और कार्य में बाधा पड़ जाएगी। इसलिए यह दोनों एक ही लाइन में होना चाहिए।

थ्रेशर सिलेंडर की घूमने की दिशा:-

जो भी थ्रेशर बाजार में आ रहे हैं। उस पर घूमने की सही दिशा दर्शाई जाती है। लेकिन कभी-कभी यह लिखा नहीं होता है। इसके लिए या तो ट्रैक्टर पुलि की दिशा ठीक करना चाहिए या पट्टे को कैंची (क्रॉस) करना चाहिए।

पट्टे का तालमेल:-

जब भी ट्रैक्टर से थ्रेशर चलाना हो या किसी और शक्ति से तो पट्टे की जरूरत होती है. इस पट्टे का तालमेल ठीक होना चाहिए। यह ठीक ना रहने से पट्टे का आपस में घर्षण होता है और पट्टा जल्दी खत्म हो जाएगा। दूसरी तरफ ज्यादा तनाव से पट्टे पर ज्यादा जोर पड़ेगा और फलस्वरुप पट्टा टूट जाएगा। इसलिए पट्टा एक या डेढ़ इंच दब जाए इतना तनाव होना चाहिए।

थ्रेसर के परनाले की ऊंचाई:-

जहां से फसल गहाई यंत्र में डाली जाती है उसकी ऊंचाई इतनी होनी चाहिए कि आसानी से यह काम हो सके। इसके लिए अगर जरूरत पड़े तो थ्रेशर के साथ लकड़ी का अस्थाई प्लेटफार्म बना दीजिए या ड्रम  रखना चाहिए।

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थ्रेशर चलाने में सावधानियां:-

  • मशीन की सफाई करें।
  • सभी नटबोल्ट कस दें।
  • अच्छे किस्म के ग्रीस से बेयरिंग के कप भर दें।
  • थ्रेशर चलाने के पूर्व हाथ से जिस दिशा में सिलेंडर घुमाना हो घुमा कर देखें, कि कहीं कोई बाधा नहीं आए अगर कोई बाधा हो तो तुरंत ठीक करें।
  • थ्रेसर का समतल ठीक है या नहीं, देख ले थ्रेशर तथा शक्ति स्त्रोत की पुली के बीच में पट्टों का तनाव ठीक करें तथा उनकी सिधाई की जांच करें।
  • थ्रेसर तथा शक्ति स्त्रोत की पकड़ अच्छी हो उसकी जांच करें। पट्टे पर बुर्जा लगाए।
  • थ्रेशर चलाने के लिए पर्याप्त शक्ति का ही उपयोग करें।
  • थ्रेशर खाली चलाकर उसकी चाल की दिशा ठीक है या नहीं, उसकी तसल्ली करें और वह ठीक करें।
  • प्रत्येक थ्रेसर गहाई की चाल (मी./मिनट) एक फसल विशेष के लिए निर्धारित होती है। अधिकांशतः यह चल गहाई ड्रम के कवर पर निर्माता द्वारा लिख दी जाती है।
  • कनकेव क्लीयरेंस की नपाई करके देखें ताकि जिस फसल की गहाई करनी हो उस के अनुरूप है या नहीं। नहीं है तो ठीक करें।
  • फसल की स्थिति देखे। वह अच्छी सुखी होनी चाहिए। ज्यादा नमी वाली फसल की गहाई करने से ज्यादा शक्ति लगती है।
  • शक्ति स्त्रोत की अच्छी तरह जांच करें। अगर ट्रैक्टर इंजन हो तो उनकी निर्माताओं के निर्देश के अनुसार जांच करके ठीक करें।
  • फसल थ्रेशर के पास रखें ताकि गहाई के वक्त ज्यादा दिक्कत ना आए।
  • पानी के ड्रम भर कर रखें ताकि कोई आग लग जाए तो तुरंत बुझा सके।

थ्रेशर चलाते समय सुरक्षा एवं सावधानियां:-

  • हमेशा परनाला लगा होना चाहिए।
  • मशीन का कोई भी भाग एक दूसरे से रगड़ ना खाएं।
  • थ्रेसर में डाली जाने वाली फसल की नमी उचित हो।
  • मशीन के अंदर के नटबोल्ट ठीक से कैसे होने चाहिए।
  • थ्रेसर में फसल समान रूप से डाले।
  • मशीन चलाते समय नशीले पदार्थों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • थ्रेशर चलाते समय चुष्ट पोशाक नहीं पहननी चाहिए।
  • श्रमिकों को थकावट होने पर कार्य न करने दे।
  • थ्रेशर के आस- पास पर्याप्त रोशनी का प्रबंध होना चाहिए।
  • ट्रेक्टर या आयल इंजन से चिंगारी निकल रही हो तो चिंगारियों के निकास का मुँह दूसरी तरफ करें ताकि आग न लगे।
  • थ्रेशर पर काम करते वक्त सतर्क रहना चाहिए।
  • गहाई जहां चल रही हो वहां हुक्का, बीड़ी, सिगरेट आदि नहीं पिए।
  • दुर्घटना के समय प्राथमिक उपचार के लिए कुछ आवश्यक दवाएं मशीन के पास रख दे।

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प्रस्तुति:-

एम.एम. शकील व आर. के. शर्मा,

पंत कृषि भवन, जयपुर (राज.)

सभार

विश्व कृषि संचार

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