पशुपालन

दूध उत्पादन में शानदार करियर- अनुदान एवं योजनाएं

Written by Vijay Gaderi

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उनकी आजीविका के साधनों को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा संचालित की जा रही है। इन योजनाओं पर अनुदान का भी प्रावधान रखा गया है। किसान व आम ग्रामीण अनुदान प्राप्त कर आजीविका के साधनों को बेहतर बना सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि अनुदान की प्रक्रियाओं को जाने। इस अंक में दूध उत्पादन करने वाले लोगों को योजनाओं और अनुदान पर जानकारी मुहैया करा रहे हैं।

दूध उत्पादन

दुग्ध उत्पादन के लिए अनुदान:-

ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक संरचना को मजबूत करने में दुग्ध उत्पादन का महत्वपूर्ण योगदान है। गावों में हो रहे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई तरह से डेयरी योजनाओं के विकास पर काम कर रही है।ग्रामीण बड़े पैमाने पर दूध का उत्पादन कर सकते हैं और इसके लिए राज्य सरकार के पशुपालन विभाग की ओर से कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। दूध उत्पादन करने की चाहत रखने वाले लोगों को दुधारू मवेशी योजना के तहत ग्रामीणों को उन्नत प्रजाति का मवेशी दिया जाता है।

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दुधारू मवेशी योजना:-

ग्रामीण क्षेत्र के गरीब रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले लोगों के लिए दुधारू मवेशी योजना के तहत लाभ देने का काम किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पादन करने वालों को 50% अनुदान एवं 50% ऋण पर दो दुधारू मवेशी दिए जाते हैं। दुधारू मवेशी गाय अथवा भैंस हो सकते है। प्रत्येक मवेशी 6 माह के अंतराल पर दिया जाता है। योजना लागत में जानवर की खरीद के लिए 70,000  दिए जाते हैं।इसके अलावा मवेशियों को रखने के लिए गौशाला के निर्माण के लिए 15,000 रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा 3 वर्षों के लिए जानवरों के लिए बीमा प्रीमियम कराया जाता है। इसके लिए 8000 का लाभ दिया जाता है।

मिनी डेयरी (पांच दुधारू मवेशी के लिए) :-

सरकार की ओर से मिनी डेयरी योजना चलाई जा रही है जिसके लिए दुग्ध उत्पादन करने वालों को अनुदान दिया जाता है। प्रगतिशील किसानों और शिक्षित युवा बेरोजगार को इस योजना के तहत पांच दुधारू मवेशी उपलब्ध कराए जाते हैं।ये मवेशी गाय अथवा भैस हो सकती है। इस योजना के तहत 50% अनुदान एवं 50% बैंक लोन पर पांच दुधारू मवेशी दिया जाता है।दो चरणों में लाभुक को मवेशी दिया जाता है। पहले चरण में 3 मवेशीऔर6 माह के बाद 2  मवेशी की खरीद के लिए पैसा बैंक के माध्यम से दिया जाता है। योजना लागत में मवेशी की खरीद के लिए 45000 रुपये एवं 3 वर्षों मवेशीयों के लिए बिमा प्रीमियम के लिए 20000 रूपये लाभुक को दिए जाते हैं।

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मिनी डेयरी (10 दुधारू मवेशी के लिए):-

युवा शिक्षित बेरोजगार तथा प्रगतिशील किसानों को एक दूसरी योजना के अंतर्गत दुग्ध उत्पादन के लिए 10 दुधारू मवेशी दिया जाता है।इस योजना का लाभ स्वयं सहायता समूह भी ले सकते हैं। सभी को 40% अनुदान एवं 60% बैंक लोन पर दुधारू जानवर उपलब्ध करवाया जाता है। योजना के माध्यम से 6 माह के अंतराल पर 55 मवेशी दिए जाते हैं उत्पादन के लिए इस योजना के माध्यम से 3,50,000 तथा शेड निर्माण के लिए 90,000 लाभुक को दिया जाता है।

दुग्ध उत्पादन को बेहतर स्वरोजगार के रूप में अपनाया जा सकता है।दुग्ध उत्पादन को रोजगार में अपनाने की चाहत रखने वाले लोग अपने जिले के जिला गव्य विकास पदाधिकारी से इस संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।इसके अलावा वे अपने निकटतम डेयरी पशु विकास केंद्र तथा जिला पशुपालन पदाधिकारी से संपर्क कर दुग्ध उत्पादन, मवेशी और अनुदान के विषय पर जानकारी ले सकते हैं।

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केंद्र सरकार की भी है योजनाएं:-

दुग्ध उत्पादन के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी कई योजनाओं को संचालित किया जा रहा है। इसके लिए दुग्ध उत्पादकों को कई तरह के अनुदान दिए जाते हैं। डेयरी एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट स्कीम के तहत दुग्ध उत्पादन करने वालों को वित्तीय सहयोग किया जाता है।यह वित्तीय सहयोग छोटे किसानों तथा भूमिहीन मजदूरों को प्रमुख रूप से दिया जाता है।डेयरी इंटरप्रेन्योरशिप डवलपमेन्ट स्क्रीम भारत सरकार की योजना है, इसके तहत डेयरी और इससे जुड़े दूसरे व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।

इसके तहत छोटे डेयरी फार्म खोलने, उन्नत नस्ल गाय अथवा भैस की खरीद के लिए 5 लाख रूपये की सहायता की जाती है। यह राशि दूध खरीद दुधारू मवेशी के लिए दी जाती है।दूध उत्पादन में रोजगार इसके अलावा जानवरों के मल से जैविक खाद बनाने के लिए एक यूनिट की व्यवस्था करने के लिए 20,000 की मदद मिलती है।किसान, स्वयं सेवी संस्था, किसानो के समूह आदि इस योजना का लाभ ले सकते हैं।यदि किसान अनुसूचित जाति वज नजाति समुदाय से आते हैं तो उन्हें अनुदान पर विशेष छूट मिलती है।

इस योजना का संपादन भारत सरकार नाबार्ड की सहायता से करता है। नाबार्ड के सहयोग डेयरी उद्योग प्रारंभ करने के लिए छोटे किसानों और भूमिहीन मजदूरों को बैंक की ओर से लोन दिलाया जाता है। बैंक से लोन प्राप्त करने के लिए किसान अपने नजदीक के वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अथवा कोऑपरेटिव बैंक को मवेशी की खरीद के लिए प्रार्थना पत्र के साथ आवेदन कर सकते हैं। ये आवेदन प्रपत्र भी सभी बैंकों में उपलब्ध होते हैं।

बड़े पैमाने पर दूध उत्पादन के लिए डेयरी फार्म की स्थापना के लिए एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट देनी होती है।संस्था द्वारा दिए जाने वाले वित्तीय सहयोग में मवेशी की खरीद आदि शामिल है। प्रारंभिक एक- दो महीने के लिए मवेशियों के चारे का इंतजाम के लिए लगने वाली राशि कोट में लोन के रूप में दिया जाता है।टर्म लोन में जमीन के विकास घेराबंदी,जलाशय, पंपसेट लगाने, दूध के प्रोसेसिंग की सुविधाएं, गोदाम, ट्रांसपोर्ट सुविधा आदि के लिए भी लोन देने के विषय में बैंक विचार करता है। जमीन खरीदने के लिए लोन नहीं दिया जाता है।

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पूरी जानकारी मुहैया कराना है जरूरी:-

इस संबंध में एक योजना का निर्माण किया जाता है। यह योजना राज्य पशुपालन विभाग, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, डेयरी को-ऑपरेटिव सोसायटी तथा डेयरी फार्मर्स के फेडरेशन को स्थानीय स्तर पर नियुक्त तकनीकी व्यक्ति की सहायता से तैयार किया जाता है। लाभुक को राज्य के कृषिविश्वविद्यालय में डेयरी के प्रशिक्षण के लिए भी भेजा जाता है। योजना में कई तरह की जानकारियों को शामिल किया जाता है।

इसमें भूमिका विवरण, पानी और चारागाह व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं, बाजार प्रशिक्षण और किसान अनुभव और राज्य सरकार या डेयरी संघ को सहायता के बारे में जानकारी प्रदान करना शामिल है।

इसके अलावा खरीद किये जाने वाले मवेशी की नस्ल की जानकारी, मवेशी की संख्या तथा दूसरी संबंधित जानकारी मुहैया कराना होता है।

इस योजना का बैंक के बैंक अधिकारियों द्वारा विश्लेषण किया जाता है और योजना के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।

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