कृषि यंत्र/ Agriculture Machinery

सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल से बुवाई कर अधिक मुनाफा

सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल
Written by Vijay Gaderi

आधुनिक कृषि में समय पर कार्य करने हेतु कृषि मशीनीकरण का अत्यंत महत्व है। परंपरागत कृषि यंत्र हस्त चलित वजंतु चलित के आने से फसल सघनता में बढ़ोतरी हुई परंतु कृषि यंत्रीकरण विकास हेतु यंत्र बनाने वाले गैर सरकारी संगठन उद्योगों का उद्देश्य है की किसानो को उपयुक्त कृषि यंत्र समय पर कार्य करने हेतु उपलब्ध कराना छोटी जोत वाले किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर से उपकरण किराए पर लेकर अपना कार्य कर सकते हैं। (सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल)

सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल

कृषि यंत्रीकरण का प्रभाव:-

  1. फसल सघनता में वृद्धि
  2. कम समय में अधिक क्षेत्र में बुवाई
  3. क्षेत्र श्रमिक उत्पादन में वृद्धि
  4. फसल उत्पादकता व लाभ में वृद्धि
  5. उपलब्ध श्रमिकों का उचित उपयोग

फर्टी कम सीड ड्रिल से बुवाई करने पर 15 से 20% बीज बचत 10 से 15% उत्पादकता में वृद्धि, 15 से 20% उर्वरकों का कम उपयोग, 20 से 30% तक समय की बचत तथा श्रमिकों का उपयोग 15 से 20% तक कम होता है।

उपयोग करने में आने वाली बाधाएं:-

  1. छोटी जोत आकार
  2. श्रमिकों की उपलब्धता
  3. किसान की आर्थिक स्थिति कमजोर होना।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों में उचित रखरखाव व मरम्मत का न होना।
  5. आधुनिक किसान अधिक उपज प्राप्त करने के लिए सावधानीपूर्वक बुवाई करता हैं।

Read Also:- मोटरसाइकिल पर रिवर्स गियर का जुगाड़

बीज के अंकुरण को प्रभावित करने वाले वाले कारण:-

  1. बीज की मात्रा
  2. बीज की गहराई
  3. मिट्टी
  4. एक कतार में बीज से बीज की दूरी
  5. दो कतारों मध्य दूरी
  6. बीज गिराने का यंत्र
  7. पाटा

सीडड्रील की विशेषताएं:-

  1. निश्चित घर की नाली बनाना।
  2. समान मात्रा में बीज गिराना बीज को क्षतिग्रस्त नहीं करना।
  3. उपयुक्त मात्रा में बीज डालना उपयुक्त गहराई पर बुवाई करना।
  4. बीज पर मिट्टी डालना।

Read Also:- कुट्टी मशीन सबसे सस्ती और हैवी

सीड ड्रिल मुख्यता दो प्रकार की होती है:-

  1. साधारण ड्रील (Plain Drill)
  2. सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल

सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल के मुख्य भाग:-

फ्रेम:-

यह लोहे का बना मजबूत फ्रेम होता है। जिस पर मशीन का भार होता है, तथा बुवाई के समय खेत में लगने वाले झटकों को सहन करने की क्षमता रखता है एवं मशीन को नुकसान पहुंचाने से बचाता है।

पहिये:-

यह लोहे के तथा डैड एक्सेल (Dead axle)पर लगे रहते हैं। पहिये के हब (Hub)परस्प्रोकेट (Sprocket)रहते हैं।जिनके द्वारा बीज गिराने के यंत्र को शक्ति मिलती है।

बक्सा:-

यह शीट मेटल का बना होता है। जिसमे बीज भरा जाता है।इसकी बनावट इस प्रकार की जाती है कि मशीन चलते समय बीज स्वतः ही सीट मीटरिंग डिवाइस में होकर गिरता है।

ट्यूब:-

यह प्लास्टिक होती है। जिसके द्वारा बीज बिना किसी नुकसान के भूमि में पहुंचता है।

Read Also:- शून्य ऊर्जा शीत गृह फलों और सब्जियों के भण्डारण के लिए

Furrow openers:-

बीज को भूमि में निश्चित गहराई पर डालने के लिए Furrow openers का उपयोग होता है। यह साधारणतया 2 प्रकार के होते है।

  1. Shoe type
  2. Hoe type
शु-टाइप:-

यह ओपन र्सफसल उत्पादन की दृष्टि से कमजोर तथा मृदा के कारण खराब हुई मृदा की बुवाई में काम आते हैं।

हो-टाइप:-

इस प्रकार के ओपनर साधारणतया पथरीली और जड़ों के द्वारा जकड़ी हुई मृदाओं की बुवाई में काम आते है।

Read Also:- सोलर ड्रायर किसानों के लिए वरदान

सीड ड्रिल का कैलिब्रेशन:-

फेरो ओपनर की संख्या = N

एक फेरो के बीच की दूरी = D.S.

ग्राउंड विल का व्यास = D

एक चक्कर में एरिया कवर्ड = XSXN

परिधि = D

एक चक्कर में क्षेत्रफल कवर्ड = एक्स डी एक्स एस एक्स एन(XDXSN)

1 हेक्टेयर = 10000 वर्गमीटर

1 हेक्टेयर में चक्करों की संख्यां=

बीज की मात्रा = K

H चक्करों = K Kg

1 चक्कर = K Kg

H

20 चक्कर में = 20XK    Kg

H

Read Also:- थ्रेसर का सुरक्षित उपयोग

About the author

Vijay Gaderi

Leave a Reply

%d bloggers like this: